राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं की निकल रही देनदारी के एवज में बिजली दरों में कमी की याचिका पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से बिजली दरों में कमी के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका पर पावर कॉर्पोरेशन से 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है।
आयोग अगर उपभोक्ता परिषद की दलीलों को मान लेता है तो अगले छह साल तक हर साल प्रदेश में बिजली दरों में सात प्रतिशत की कमी हो सकती है। आयोग पावर कॉर्पोरेशन का जवाब मिलने के बाद इस मामले पर औपचारिक रूप से सुनवाई शुरू करेगा।
उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 2019-20 तक 22,045 करोड़ सरप्लस निकल रहा है। 2020-21 के ट्रू-अप में भी 3088 करोड़ रुपये निकला है। इस तरह बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं की 25,133 करोड़ रुपये की देनदारी निकल रही है। उपभोक्ताओं को दरों में कमी के रूप में इसका लाभ मिलना चाहिए।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह से मिलकर इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। नियामक आयोग के अध्यक्ष के निर्देश पर सचिव संजय कुमार सिंह ने मंगलवार को पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) से उपभोक्ता परिषद की याचिका पर 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। इसके बाद आयोग विधिवत सुनवाई शुरू करेगा।