यूपी में स्टांप एवं पंजीयन विभाग सेवा कर रहा है, या फिर मुनाफा कमा रहा है। यह बात कैबिनेट में तय होगी। मोहनलालगंज में विभाग के ऑफिस के लिए निशुल्क जमीन की मांग पर चर्चा छिड़ी है। बताते चलें कि सेवारत श्रेणी में शामिल विभागों को ही ग्राम समाज की मुफ्त जमीन मिलती है।
उत्तर प्रदेश में सरकार को राजस्व देने वाला तीसरा सबसे बड़ा विभाग स्टांप और पंजीयन विभाग सरकारी सूची के सेवारत विभागों में दर्ज ही नहीं है। इसका खुलासा तब हुआ जब मोहनलालगंज में नए ऑफिस के लिए निशुल्क जमीन का आवेदन विभाग ने किया।
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इस पर वहां से जवाब मिला कि पहले यह बताएं कि स्टांप एवं पंजीयन विभाग सेवारत है या व्यवसायिक। नियमों के मुताबिक, सिर्फ सेवारत विभागों को ही ग्राम समाज की मुफ्त जमीन दी जा सकती है। इस खुलासे के बाद अब कैबिनेट में स्टांप विभाग को सेवारत की सूची में दर्ज करने का प्रस्ताव लाने की तैयारी है।
स्टांप एवं पंजीयन विभाग में तमाम बदलाव किए गए हैं। एक तरफ बिना स्टांप शुल्क बढ़ाए विभाग की आमदनी आठ साल में तीन गुना हो गई है। वहीं दूसरी तरफ फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ई स्टांप जारी किए गए हैं। जमीन संबंधी पारिवारिक विवाद खत्म करने के लिए पांच हजार रुपये में गिफ्ट डीड योजना लाई गई है।
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इसी क्रम में अब हर जिले और तहसील में विभाग अपने कार्यालय बना रहा है। मोहनलालगंज में भी विभाग ने अपने कार्यालय के लिए जमीन प्राप्त करने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा था। पत्र मिलने के बाद विभाग में खोजबीन की गई तो पाया गया कि आजतक स्टांप विभाग सेवा करने वाले विभागों की सूची में दर्ज ही नही है बल्कि मुनाफा कमाने वाले व्यवसायिक विभागों में एक है।
इस बारे में शासन के उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक राजस्व विभाग में एक नियम है कि ग्राम समाज की जमीन निशुल्क उन्हीं विभागों को दी जाएगी, जो सेवारत होंगे। कौन से विभाग सेवारत हो सकते हैं और कौन से व्यवसायिक, इसकी जानकारी के लिए कुछ विभागों के उदाहरण दिए गए हैं।
स्टांप एवं पंजीयन व विभाग को भी लेकर श्रेणी स्पष्ट नहीं है। इससे ग्राम समाज की जमीन निशुल्क नहीं मिल सकती। इसके लिए जल्द ही स्टांप व पंजीयन विभाग को सेवारत विभाग में शामिल कराने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।