राजधानी में विभिन्न दवा फर्मों की जांच करती एफएसडीए की टीम।
- फोटो : संवाद
लखनऊ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने 25 फर्मों पर छापेमारी कर 26.60 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध और नकली दवाएं बरामद करने के साथ कारोबार से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन फर्मों से 52 संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए गए हैं। 12 फर्मों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। इसी अभियान के दौरान आलमबाग में पकड़ी गई संदिग्ध दवाओं की खेप ने वाराणसी तक फैले अंतरजनपदीय रैकेट का खुलासा कर दिया है।
एफएसडीए की टीम ने नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ अभियान चलाते हुए लखनऊ और वाराणसी में कार्रवाई कर यह सफलता पाई। छापेमारी के दौरान आलमबाग बस स्टेशन के पास एक कार्टन से दर्द और सूजन रोकने की 4800 और संक्रमण रोकने वाली 2940 टैबलेट बरामद हुईं, जिनकी कीमत करीब 1.60 लाख रुपये बताई गई। जांच में पैकिंग और प्रिंटिंग में गंभीर गड़बड़ियां मिलने पर इन्हें नकली माना गया। मौके से वाराणसी निवासी विमल कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर वाराणसी के चौधरी कटरा स्थित न्यू सर्जिकल स्टोर पर छापा मारकर करीब 25 लाख रुपये की दवाएं जब्त की गईं और संचालक संदीप श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद विभाग की 18 सदस्यीय संयुक्त टीम ने अमीनाबाद, ट्रांसपोर्ट नगर और सरोजनीनगर समेत विभिन्न क्षेत्रों में 25 दवा फर्मों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई फर्में खरीद-बिक्री के अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिसके चलते 1.77 लाख रुपये की दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई। साथ ही 12 फर्मों के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले में अंतरजनपदीय नकली दवा नेटवर्क की जांच जारी है। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और फर्मों के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत न्यायालय में अभियोजन चलाया जाएगा।
राजधानी में विभिन्न दवा फर्मों की जांच करती एफएसडीए की टीम। - फोटो : संवाद
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