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Lucknow News: बंद हुए खेलों की सुविधाओं पर जड़ा ताला, बड़े प्रोजेक्ट अधर में

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लखनऊ। वैसे तो लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण का उद्देश्य प्रदेश के चुनिंदा खिलाड़ियों तराशना है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काॅलेज की साख पर बट्टा लग गया। 153 एकड़ में फैले कॉलेज प्रांगण में तमाम खेल सुविधाएं बना दी गईं, लेकिन रखरखाव के अभाव में इनका उपयोग नहीं किया गया। कॉलेज प्रांगण में प्रवेश करते ही बदहाल पड़े दो टेनिस कोर्ट को देखकर इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ओलंपिक साइज स्वीमिंग पूल की भी स्थिति भी ऐसी है। ये दोनों ही खेल एक समय कॉलेज में संचालित किए जाते थे। वर्ष 2015 में खराब परिणाम के चलते इन्हें बंद कर दिया गया।
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वेटलिफ्टिंग सेंटर की हो गई विदाई

कॉलेज प्रांगण में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की ओर से वेटलिफ्टिंग सेंटर वर्ष 2000 में स्थापित किया गया। 16 साल तक चले सेंटर में रेनू बाला, सोनिया चानू, स्वाति सिंह समेत कई महिला खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में पदकों की झड़ी लगा दी। साई कोच जेपी शर्मा के निर्देशन में चले कैंप में ट्रेनिंग करने वाली महिला खिलाड़ियों ने करीब 125 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते। इधर, कोच साहब का रिटायरमेंट हुआ और उधर सेंटर को लखनऊ साई सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया।

वेलोड्रोम का अता-पता नहीं

वर्ष 2016 में कॉलेज प्रांगण में जोर-शोर के साथ वेलोड्रोम (इंडोर साइकिलिंग ट्रैक) का निर्माण शुरू हुआ। शुरुआती बजट तकरीबन 250 करोड़ रुपये रखा गया। काम शुरू हुआ, लेकिन दस साल बीत जाने के बावजूद अभी तक इस मेगा प्रोजेक्ट में महज 60 करोड़ रुपये ही स्वीकृत हुए हैं। बजट के अभाव में यहां लंबे समय से काम रुका हुआ है।
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इस दौरान शासन स्तर पर वेलोड्रोम के बजट और स्वरूप में कई बार परिवर्तन किए गए, लेकिन बजट के अभाव में काम रुका रहा। मिली जानकारी के अनुसार शासन स्तर पर एक बार फिर वेलोड्रोम बनाने की कवायद तेज हुई है लेकिन अभी तक बजट को लेकर कोई स्वीकृति नहीं मिली है।

कॉलेज में जिन खेलों का संचालन होता है, उन्हीं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। महिला वेटलिफ्टिंग सेंटर और वेलोड्रोम के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकता हूं। साई की ओर से कुछ अच्छे प्रस्ताव मिले हैं। जल्द ही उनपर काम किया जाएगा। - डॉ. अतुल सिन्हा (कार्यवाहक प्रिंसिपल, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज)
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