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Lucknow News: मेले में साहित्य के साथ भायीं आध्यात्मिक पुस्तकें

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लखनऊ। रवींद्रालय में चल रहे नौ दिवसीय लखनऊ पुस्तक मेले का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान साहित्य के साथ ही आध्यात्मिक पुस्तकों की खूब मांग रही। बच्चों की किताबें भी खूब बिकीं। आखिरी दिन साहित्यिक मंच पर कवि सम्मेलन में कविताएं गूंजीं तो वहीं पुस्तक विमोचन के साथ प्रतिभागियों का सम्मान भी किया गया। मेला निदेशक आकर्ष चंदेल ने बताया कि इस बार तकरीबन 25 लाख रुपये से अधिक मूल्य की किताबें बिकीं।
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आकर्ष चंदेल ने बताया कि बच्चों और युवाओं की भागीदारी मेले में सर्वाधिक रही। हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के साथ आध्यात्मिक पुस्तकें भी लोगों ने खूब पसंद कीं। समापन समारोह में चिल्ड्रेन बुक ट्रस्ट, दिव्यांश पब्लिकेशंस, नवपल्लव, अदित्रि बुक्स, राष्ट्रधर्म प्रकाशन, नमन प्रकाशन, नवपल्लव, बोधरस प्रकाशन आदि अन्य प्रतिभागी प्रकाशनों, वितरकों और यूपी त्रिपाठी, ज्योति किरन रतन आदि सहयोगियों को मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।


इससे पहले मंच पर गौतम चटर्जी के पुस्तक काशी शैविज्म का विमोचन कथक नृत्यांगना और पं. बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर ने किया। प्रो. प्रकाश ने कहा कि पुस्तक विषय पर लेखक की गहन पैठ से निकली है। इस अवसर पर लमही के संपादक विजय राय, कला वसुधा के संपादक शाखा बंद्योपाध्याय आदि की मौजूदगी रही।
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सुबह के सत्र में लक्ष्य संस्थान का कवि सम्मेलन उमेश चंद्र दुबे की अध्यक्षता में हुआ। डाॅ. शरद पांडेय शशांक के संचालन में मानस मुकुल त्रिपाठी मानस, कुलदीप शुक्ल, मंगल सिंह, विश्वम लवलीन, सुनील कुमार वाजपेई, सीमा, मिशा सिह नवल, अनुजा मनु, गायत्री जोशी अरुणिमा, प्रवीण कुमार शुक्ल गोबर गणेश, मनमोहन बाराकोटी, शिवमंगल सिंह मंगल, श्याम मिश्र, कृपाशंकर श्रीवास्तव विश्वास, सुनील वाजपेयी व डाॅ. निशा सिंह ने रचनाएं पढ़ीं।
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