अमेरिका में भारतवंशी स्पाइन सर्जन्स की संस्था इंटनरेशनल सोसाइटी फॉर द एडवांसमेंट ऑफ स्पाइन सर्जरी (आईएसएएस) केजीएमयू के साथ मिलकर रीढ़ की हड्डी की चोटों के इलाज में मदद करेगी।
वहां के युवा आर्थोपैडिक सर्जन को रीढ़ की हड्डी की सर्जरी की नई तकनीक से रूबरू कराएगी। साथ ही उन्हें अत्याधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी देगी। केजीएमयू के आर्थोपैडिक विभाग में मंगलवार को मीडिया से बातचीत में ये जानकारी प्रो. आरएन श्रीवास्तव और यूएसए से आए संस्थान के चेयरमैन डॉ. दिलीप सेनगुप्ता ने दी।
प्रो. आरएन श्रीवास्तव ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, टीबी, ट्यूमर, डिस्क प्रोलेप्स (चिक जाना) जैसी बीमारियों की सर्जरी केजीएमयू की जाती है। इन सर्जरी में कई एडवांसमेंट भी हुए हैं। इन्हीं की जानकारी डॉ. दिलीप सेनगुप्ता आगामी तीन दिनों तक देंगे। इस दौरान कई सर्जरी भी की जाएंगी।
प्रो. आरएन श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को 38 वर्षीय विशाल बाजपेई की रीढ़ की हड्डी की सर्जरी की गई। पेंटिंग करने के दौरान विशाल सीढ़ी से गिर गया था, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया था और वह उठकर बैठने में भी सक्षम नहीं था।
उसके पैरों की ताकत पूरी तरह से खत्म हो गई थी। डॉ. सेनगुप्ता के नेतृत्व में विशाल की सर्जरी की गई। अब वह उठकर बैठ सकता है। उम्मीद है कि उसके पैरों की ताकत भी वापस आ जाएगी।