वरुण गांधी को भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के पद से हटाया जाना भले ही लोगों को चकित कर रहा हो लेकिन वरुण गांधी के कैंप में इसे लेकर मायूसी नहीं है और वे दावा कर रहे हैं कि उन्हें कोई और बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है।
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वरुण गांधी के नजदीकी लोगों का दावा है कि पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश करने का वादा किया है।
हालांकि इस बात की जानकारी प्रदेश भाजपा को नहीं है। प्रदेश में पार्टी प्रवक्ता डॉ। मनोज मिश्र ने अमर उजाला से कहा, 'यह तो केंद्र का विषय है। हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है।'
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केंद्रीय नेताओं ने साधी चुप्पी
केंद्र में भाजपा के नेता भी इस पर फिलहाल कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह अभी दूर की कौड़ी है। उनके हिसाब से एक तो वरुण गांधी अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं यानी परिपक्व नहीं हैं और दूसरे अभी यूपी के चुनाव को बहुत समय बाकी है।
विश्लेषक कह रहे हैं कि सच सिर्फ इतना है कि अमित शाह ने फिलहाल तो उनको अपनी टीम से हटा दिया है और वे उनका कैंप जो कुछ भी कहे वह नुकसान को कम करके दिखाने की कोशिश भर है।
वरुण कैंप की दिलचस्प कहानी
लेकिन वरुण गांधी कैंप के पास बताने को जो कहानी है वह भी अच्छी खासी दिलचस्प है। एक बेहद करीबी सूत्र की मानें तो टीम का एलान करने से पहले स्वतंत्रता दिवस की रात अमित शाह ने वरुण को फोन किया था।
सूत्र ने बताया कि वरुण का मोबाइल घनघनाया, तो शाह ने वरुण से कहा कि आप यूपी को ही अपना केंद्र बिंदु बना लीजिए।
हालांकि, शाह के मन में ये सवाल भी था कि वरुण के परिवार में किसी ने राज्य की राजनीति नहीं की। उन्होंने इस पर भी वरुण से सवाल किया, 'आपके परिवार में सभी लोगों ने देश की राजनाति की है। क्या आप यूपी में आगे जाना चाहेंगे?'
वरुण ने भी हामी भर दी। शनिवार को शाह की टीम का एलान भी हो गया। वरुण का नाम लिस्ट के महासचिव कॉलम से गायब था।
पहले ही तैयार थी पृष्ठभूमि
कहा जा रहा है कि वरुण से हुई इस बातचीत की पृष्ठभूमि नरेंद्र मोदी और भाजपा आलाकमान से चर्चा करने के बाद शाह पहले ही तैयार कर चुके थे।
जैसा कि वरुण गांधी के एक बेहद करीबी सूत्र ने बताया, शाह ने पिछले दिनों वरुण गांधी को खुद दिल्ली बुलाकर यूपी पर गहन चर्चा की थी। उस वक्त सबसे बड़ा सवाल था कि यूपी में भाजपा का चेहरा कौन होगा। शाह ने बड़ी उम्मीद से वरुण की रजामंदी चाही।
वरुण ने मौन स्वीकृति दी और गेंद शाह के पाले में छोड़ यूपी लौट आए थे।
घातक रहा ऑनलाइन कैंपेन?
लेकिन इसी दौरान, वरुण को यूपी का सीएम बनाने के लिए ऑनलाइन अभियान शुरू हो गया। कुछ युवाओं ने तो तमाम विधानसभा सीटों का सर्वे तक करा डाला और बता दिया कि वरुण गांधी सूबे के सबसे लोकप्रिय युवा नेता हैं।
भाजपा के नेता मानते हैं कि यह कदम ही वरुण गांधी के लिए घातक सिद्ध हुआ वरना तो वे महासचिव रहते हुए भी यूपी में काम करते रह सकते थे।
कुछ विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर डाल रहे हैं कि चुनाव से तीन साल पहले वरुण को ये आश्वासन पार्टी क्यों देगी। उनका मानना है कि महासचिव या कोई अन्य पद पर रहते हुए भी वरुण ये जिम्मेदारी संभाल सकते थे।