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बच्चों के विशेषज्ञ मार रहे मच्छर

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सीएमओ ऑफिस में तैनात कई विशेषज्ञ चिकित्सक मच्छर मार रहे हैं। अपना मूल काम छोड़ ये प्रशासनिक पदों पर जमे हैं। जबकि इन्होंने विशेषज्ञता हासिल करने के लिए दो-दो साल का कोर्स भी किया, मगर मरीज देखने में इन्हें कोई रुचि नहीं है। सीएमओ ऑफिस में तैनात ऐसे डॉक्टरों की फेहरिस्त लंबी है।
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सीएमओ कार्यालय में डिप्टी-एडिशनल सीएमओ रैंक के नौ अफसर तैनात हैं। इसमें पांच डॉक्टरों ने विशेषज्ञता हासिल करने के लिए शासन से अनुमति लेकर दो-दो साल का कोर्स किया। मगर वापस लौटने के बाद इन नेत्र रोग, बाल रोग विशेषज्ञों ने दोबारा सीएमओ के अधीन ज्वॉइनिंग कर डिप्टी सीएमओ रैंक की कुर्सी संभाल ली। शासनादेश के मुताबिक प्रशासनिक पद पर जमे विशेषज्ञों को अस्पताल में भी सेवाएं जरूर देनी होंगी, मगर यह आदेश सिर्फ कागजों में दबकर रह गया है। सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल के मुताबिक जो डॉक्टर प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उन्हें मरीज भी देखने होंगे, सभी को ये निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के आदेश बाद भी ओपीडी से किनारा
मुख्यमंत्री-डिप्टी सीएम के आदेश के बाद भी स्वास्थ्य महानिदेशालय, सीएमओ ऑफिस समेत अन्य विभागों में जमे कई डॉक्टर मरीजों को अपनी सेवाएं नहीं दे रहे हैं। बीते साल सख्ती होने पर कुछ विशेषज्ञों ने अस्पतालों में हफ्ते में एक या दो दिन जाकर अपनी सेवाएं देना शुरू किया था। समय बीतने के साथ सेवाएं भी बंद हो गईं।
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