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लोकायुक्त की 150 विशेष रिपोर्ट ठंडे बस्ते में

Sat, 20 Sep 2014 03:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लोकायुक्त व उप लोकायुक्त की करीब 150 विशेष रिपोर्टें ठंडे बस्ते में हैं। राज्यपाल राम नाईक के कड़े रुख के बाद सरकार हरकत में आई है। अब रिपोर्टों को निकलवाकर संबंधित विभागों से कार्रवाई के संबंध में जवाब-तलब किया जा रहा है।
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शुक्रवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने आला अधिकारियों के साथ बैठक कर इन विशेष रिपोर्टों पर अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की।

उन्होंने सतर्कता अधिष्ठान को दो माह में लंबित प्रकरणों की जांच करके शासन को स्टेटस रिपोर्ट देने के निर्देश देते हुए नियमित रूप से लोकायुक्त को जांच की प्रगति की सूचना भी भेजने की हिदायत दी।

लंबित विशेष रिपोर्टों पर कार्रवाई कराकर स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ विधानमंडल के आगामी सत्र में सदन के दोनों सदनों पर रखने का फैसला किया गया है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में सतर्कता के अलावा राजस्व, ग्राम्य विकास, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक निर्माण, पंचायती राज, दुग्ध विकास, आवास एवं नगर विकास विभाग समेत कुल 34 विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
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समीक्षा में पता चला कि 2006 से अब तक लोकायुक्त व उप लोकायुक्त की ओर से राज्यपाल को लगभग 150 विशेष रिपोर्टें भेजी गई हैं।

लोकायुक्त व उप लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शासन को राज्यपाल के निर्देश पर विशेष रिपोर्ट पर कार्रवाई करके स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ उसे विधानमंडल के दोनों सदनों के पटल पर रखवाना चाहिए लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।

अब जब राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा तो सरकारी मशीनरी हरकत में आई है। गौरतलब है कि लगभग एक दर्जन से ज्यादा पूर्व मंत्रियों के अलावा कई अधिकारियों, कर्मचारियों व निकायों के प्रतिनिधियों के बारे में भेजी गई विशेष रिपोर्ट पर कार्रवाई लंबित है।

पूर्व मंत्रियों में ज्यादातर मायावती सरकार के मंत्री हैं। मुख्य सचिव ने सतर्कता अधिष्ठान को जांच में तेजी लाने का निर्देश देते हुए कहा कि इसकी नियमित सूचना लोकायुक्त को भेजी जाए।

मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में लोकायुक्त की ओर से सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट और सिफारिशों पर त्वरित कार्रवाई करके तय समय में लोकायुक्त को कृत कार्रवाई से अवगत करा दिया जाए जिससे विशेष रिपोर्ट भेजने की जरूरत ही न पड़े।
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