तू-तू-मैं-मैं हममें भी होती है। गलत-सही हर बात पर हम बात करते हैं वो भी सुबह सात बजे की चाय पर। हालांकि यह सिस्टम मेरे ससुरजी का बनाया हुआ है, लेकिन उसे सख्ती से लागू करवाया सासू मां अचला भार्गव ने। सास-बहू के खट्टे-मीठे रिश्तों की कहानी सुना रही बहू शिखा भार्गव।
शिखा कहती हैं कि मैं पति के साथ बिजनेस में हाथ बंटाती हूं। दस साल हो गए मुझे इस घर की बहू बने। भूल से भी कभी उन्होेंने हमें डांटा नहीं। मेरी देवरानी श्वेता और मैं अक्सर उनके उठने के बाद ही उठते हैं। तब तक वह अपने कई काम निपटा चुकी होती हैं। घर में क्या सामान है और क्या नहीं, इसकी चिंता उन्होंने कभी हमें करने ही नहीं दी।
इसके बाद हम सात बजे की चाय साथ पीते हैं। सारी बहस, सारे फैसले और देश-दुनिया की बातें उसी वक्त हो जाया करती हैं। शिखा कहती हैं कि मैं तीन साल पहले इनरव्हील क्लब की प्रेसीडेंट थी। बहुत व्यस्त रहने लगी थी। उस वक्त मम्मी ने बच्चों को भी संभाला और घर भी। हालांकि कहती रहीं कि अब घर तुम लोग संभालो, हमें हमारी जिम्मेदारी का अहसास भी कराती रहीं लेकिन सब खुद ब खुद करती रहीं।
दोनों बहुओं को बराबर महत्व
सास अचला
- फोटो : amarujala
बेटी से पहले बहू को तरजीह दी
शिखा और श्वेता दोनों कहती हैं कि कई बार ऐसा मौका आया जब उन्हें बेटी या बहू के लिए वे एक ही समय पर जरूरत बन गईं। उन्होंने बहुओं को चुना। चाहे वो हमारी डिलीवरी का समय हो या फिर कोई और। सच कहूं तो बेटी के साथ तो उनका झगड़ा भले ही हो जाए, पर हमसे कभी बहस नहीं होती। चाहे हमारे लिए चाय बनाना हो या फिर नाश्ता। उन्होंने कभी इसके लिए अपने बेटे-बहू में फर्क नहीं किया।
दोनों बहुओं को बराबर महत्व
किसी वक्त मैं कुछ अच्छा करती हूं, किसी वक्त श्वेता। पर कभी भी ऐसा दिन नहीं आया, जब उन्होंने अकेले मेंरी या उसकी तारीफ की हो। सार्वजनिक मंच पर उन्होंने हमेशा यही कही कि नहीं मेरी दोनों बहुएं इसे बेहतर करती हैं। और सबसे बड़ी बात, उन्होंने कभी किसी को हमारी बुराई करने नहीं दी।
हर रिश्ते में सम्मान जरूरी
अचला भार्गव कहती हैं कि हमने अपने घर में कुछ ऐसा माहौल बना रखा है कि कोई किसी से कुछ छिपाता नहीं। कोई किसो को रोकता-टोकता नहीं। मेरा मानना है कि जरूरी नहीं कि जो मेरे लिए सही है, वह अगले की नजर में भी सही ही हो। हम सास-बहू का रिश्ता एक दूसरे की सोच का सम्मान करने पर टिका है।