स्वास्थ्य विभाग ने स्वस्थ होने पर मरीजों को डिस्चार्ज करने संबंधी नई गाइडलाइन में स्वच्छता पर फोकस किया है। उसे डिस्चार्ज करते समय उनके कपड़ों के अलावा मोबाइल फोन, जुते-चप्पल व अन्य सामान को अल्कोहल से बनी सेनिटाइजर या हाइड्रोजन पैरॉक्साइड से विसंक्रमित किया जाएगा। साथ ही स्वस्थ होने वाले मरीजों यह भी बताया जाएगा कि वह घर में किस तरह से स्वच्छता का ध्यान रखें।
नई गाइडलाइन के मुताबिक अगर कोरोना संक्रमित व्यक्ति को होम आइसोलेशन की व्यवस्था नहीं है तो उसे लेवल-वन के अस्पताल में भर्ती किया जाए। भर्ती होने के बाद ऐसे मरीजों का तापमान, सांस लेने की दर और ऑक्सीजन सैचुरेशन बढ़ता है तो उसे जरूरत के हिसाब से लेवल-टू और थ्री अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।
वहीं जिन मरीजों में लोअर रेस्पिरेटरी टैक्ट इंफेक्शन के लक्षण होंगे या खांसी व बुखार होगा और सांस लोने में परेशानी समेत अन्य समस्याएं होंगी, उन्हें डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में भेजा जाएगा। अस्पताल में भर्ती होने के बाद जब मरीज की स्थिति नियंत्रित हो जाए तो उसे होम आइसोलेशन के लिए डिस्चार्ज किया जा सकेगा।
जिन मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बाद भी इसका सैचुरेशन मेंटेन नहीं होगा और वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी तो उसे गंभीर रोगी के श्रेणी में माना जाएगा। वहीं, कैंसर, एचआईवी व अंग प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को हर हाल में लेवल-टू या थ्री अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। ऐसे मरीजों को आईसीयू में रखा जाएगा।
घर-घर जाएगी रैपिड रिस्पांस टीम
नई गाइडलाइन में रैपिड रिस्पांस टीम को घर-घर जाकर होम आइसोलेशन वाले मरीजों की स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। जिन जिलों में सबसे कम मरीज होंगे, वहां तीसरे व सातवें दिन दोबारा टीम घर जाकर संबंधित मरीज के बारे में जानकारी लेगी। वहीं, जिन जिलों में 100 से 200 नए केस मिल रहे हैं, वहां होम आइसोलेशन के तीसरे दिन रोगी की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
जबकि 200 से अधिक केस वाले जिलों में होम आइसोलेशन शुरू होने से दसवें दिन तक लगातार इंटीग्रेटेड कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से फोन के जरिए मरीज की स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि 10 दिन तक मरीज में किसी तरह का लक्ष्मण नहीं पाया गया तो उसे रिकवर्ड श्रेणी में माना जाएगा।