उत्तर प्रदेश में मिलावटखोरी रोकने की नई रणनीति अपनाई गई है। अब सैंपल जांच में लगी एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) लैब की टीम और सैंपल भेजने वाली टीम की मिलीभगत खत्म हो जाएगी। इसके लिए सभी सैंपलों पर क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू की गई है। इस नई व्यवस्था से विभाग में हलचल मची है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि किसी दुकान से सैंपल भरने के बाद उसे बदलने से लेकर खराब करने तक का खेल चलता था। इस पूरे खेल में जिलों में कार्यरत कर्मचारियों से लेकर लैबकर्मी तक शामिल होते थे। कई बार सैंपल जांच से पहले ही खराब हो जाते थे। इतना ही नहीं कई बार नामचीन कंपनियां अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सैंपल बदलवा देती थीं। अब क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू होने के बाद सैंपल खराब होने की दर एक फीसदी से भी कम हो गई है। पहले यह 10 से 20 फीसदी तक थी।
उदाहरण के लिए हमीरपुर से हल्दी पाउडर का सैंपल भरा गया। इस सैंपल के आने पर उस पर नया क्यूआर कोड लगा दिया जाता है। फिर एक ट्रे में सभी जिलों के सिर्फ हल्दी के ही सैंपल रखे जाएंगे। माइक्रोबायोलॉजिस्ट व जांच में लगी अन्य टीम को सिर्फ कोड की जानकारी दी जाती है। उसे यह नहीं पता चलता कि संबंधित सैंपल किस जिले से आया है।
आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग राजेश कुमार ने बताया कि खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच को लेकर कई बार संदेह जताया जाता है। अब इस संदेह को खत्म कर दिया गया है। सैंपल भरने के बाद उसकी रिपोर्ट में किसी तरह का बदलाव नहीं हो सकेगा। इसके लिए क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है। जल्द ही अन्य लैब में भी इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।