अयोध्या स्थित ढांचा ध्वंस मामले में सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने दोनों गवाहों को पीड़ित मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने बहस की मांग वाली उनकी अर्जी खारिज कर दी। इससे पहले सीबीआई के वकील ललित कुमार सिंह और आरके यादव ने इस अर्जी का विरोध किया।
Special CBI judge S K Yadav today rejected pleas of 2 prosecution witnesses seeking permission to file written arguments in Babri Masjid demolition case. Court held that they were not victims in the case.
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32 accused including BJP leader LK Advani are facing trial in the case.
विशेष न्यायाधीश एसके यादव ने कहा कि यह मामला वर्षों से लंबित है, लेकिन दोनों गवाहों सैय्यद अखलाक अहमद और हाजी महबूब अहमद ने खुद को पीड़ित बताकर कोर्ट में कभी कोई अर्जी नहीं दी। अब अभियोजन की गवाही पूरी हो चुकी है, आरोपियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और सीबीआई ने अपनी लिखित बहस भी दाखिल कर दी है। ऐसे में लगता है कि मुकदमे में अनावश्यक देरी उत्पन्न करने की नीयत से दोनों गवाहों ने अर्जी दी है।विज्ञापन विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि दोनों गवाहों को सीबीआई ने पक्षद्रोही घोषित नहीं किया है। दोनों ने जो गवाही दी है, निर्णय के समय उसकी समीक्षा की जाएगी। दोनों गवाह पीड़ित की श्रेणी में नहीं आते, लिहाजा उन्हें अपनी पसंद का वकील नियुक्त करने और बहस दाखिल करने की अनुमति देने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने बचाव पक्ष को लिखित बहस दाखिल करने के लिए 26 अगस्त की तारीख तय की है। सुनवाई के समय कोई भी आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं था। उनकी ओर से हाजिरी माफ करने की अर्जी दी गई।