एडीबी ने राज्य सरकार को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो मेगा माडर्न एग्रीकल्चर होलसेल मार्केट की स्थापना का सुझाव दिया है। कहा, अगर प्रयोग सफल लगे तो सरकार और जगहों पर भी स्थापित करे। सरकार को यह काम पीपीपी मोड में आगे बढ़ाने की सलाह दी है। बैंक ने कहा है कि प्राइवेट सेक्टर इस सिस्टम में वित्तीय मदद देने के साथ ही मंडी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी ले सकते हैं। बैंक ने इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने के लिए सरकार को विशेषज्ञों की एक टीम को स्पेन भेजने की सलाह दी है।
किसान को तीन रुपये नहीं मिलते, बाजार में बिकता 22 रुपये किलो आलू
एडीबी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जून में जब किसानों को आढ़तियों को तीन रुपये प्रति किलो से भी कम में आलू बेचना पड़ा था, उस वक्त फुटकर बाजार में आलू की कीमत 18 से 22 रुपये प्रति किलोग्राम थी। जबकि विकसित देशों में फुटकर कीमत की 50 प्रतिशत से अधिक कीमत किसानों के हिस्से में जाती है। उत्पादन बढ़ने पर आलू बर्बाद होना और घटने पर कीमत आसमान होने पर भी उसकी सही कीमत न मिलना, किसानों की दुर्दशा की वजह बना हुआ है। क्योंकि उन्हें सही मूल्य दिलाने के लिए यहां कोई तंत्र नहीं है।
3541 करोड़ का आलू, प्याज व टमाटर हर साल होता है बर्बाद
प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज की कमी ही किसानों के नुकसान का एकमात्र कारण नहीं है। पैकेजिंग, प्री कूलिंग सुविधा और वैल्यू चेन के अभाव में भी आलू बर्बाद हो जाता है। एडीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 17 प्रतिशत प्याज, 21 प्रतिशत आलू और 35 प्रतिशत टमाटर खेत से निकलने के बाद बर्बाद हो जाता है। इसमें मात्रा के लिहाज से सबसे ज्यादा नुकसान आलू का होता है।
प्याज जहां 10 हजार टन में 17.52 टन बर्बाद होता है, वहीं आलू 271.62 व टमाटर 20.68 टन बर्बाद हो जाता है। हर साल उत्पादन के बाद प्रदेश में करीब 3541 करोड़ रुपये का आलू, प्याज और टमाटर बर्बाद हो जाता है।