समाजवादी पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बागी नेताओं को सबक सिखाना शुरू कर दिया है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को यूथ विंग के दो पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों आनंद भदौरिया और सुनील यादव साजन को पार्टी से निष्कासित कर दिया। कृषि मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह और अलीगंज (एटा) के विधायक रामेश्वर यादव के बेटे सुबोध यादव को कड़ी चेतावनी दी गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा प्रत्याशियों को अपने ही दल के नेताओं की बगावत का सामना करना पड़ रहा है। कई जिलों में तो सपा नेता, विधायक और मंत्री आमने-सामने हैं। बागी नेताओं को संदेश देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चार दिन पहले ही गोरखपुर के कई सपा नेताओं पर कार्रवाई की थी।
यूथ विंग के दो जिलाध्यक्षों को पद से भी हटा दिया गया था। इसके बावजूद अन्य जिलों में भी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ गुटबंदी मुखर है। सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने शुक्रवार को समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त मंत्री रहे सुनील यादव साजन और लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और रहे आनंद सिंह भदौरिया को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
इन जिलों में स्थानीय नेता कर रहे थे विरोध
सपा ने उन्नाव में ज्योति रावत और सीतापुर से सीमा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। इनका स्थानीय सपा नेता विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वालों में साजन और भदौरिया के शामिल होने को पार्टी ने गंभीर अनुशासनहीनता माना है। दोनों का पार्टी से निष्कासन कर दिया गया।
एटा जिले के अलीगंज क्षेत्र से विधायक रामेश्वर यादव के बेटे सुबोध यादव को भी कड़ी चेतावनी दी गई है। उन पर भी अधिकृत उम्मीदवार का विरोध करने का आरोप है।
पंडित सिंह को निर्देश, विजयलक्ष्मी को जिताओ
गोंडा में सपा ने पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह को प्रत्याशी बनाया है। कृषि मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह उनका सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनकी पुत्रवधु और भतीजे की पत्नी भी चुनाव जीती हैं। वह इनमें से किसी को उम्मीदवार बनाना चाहते थे।
मंत्री समर्थकों ने एक दिन पहले ही दावा किया था कि विजयलक्ष्मी का टिकट काट दिया गया है लेकिन सपा के प्रदेश प्रवक्ता व मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने प्रत्याशी में किसी बदलाव से इन्कार किया है।
यहां इन्हें मिला मौका
उधर, योगेश प्रताप सिंह ने कहा है कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी पत्नी को प्रत्याशी बनाकर जो भरोसा जताया है, उस पर वह खरे उतरेंगे। पहले भी पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी ईमानदारी से निभाया है।
सपा सूत्रों के रामगोपाल यादव ने पंडित सिंह को निर्देश दिए हैं कि वे विजय लक्ष्मी सिंह की जीत सुनिश्चित करने में पूरी मदद करें। विजय लक्ष्मी चुनाव हारी तो वह जिम्मेदार होंगे।
कई जिलों में मंत्री-विधायक आमने-सामने:
अमरोहा में मंत्री महबूब अली व पूर्व सांसद चन्द्रपाल सिंह आमने-सामने हैं। महबूब की पत्नी का टिकट काटकर सपा ने चन्द्रपाल सिंह की पुत्रवधु को प्रत्याशी बनाया है। महबूब समर्थक बगावत का झंडा बुलंद किए हुए हैं।
कमोबेश यही हाल बिजनौर में हैं वहां अधिकृत प्रत्याशी नीलम पारस के खिलाफ उदयनवीरा ताल ठोक रहे हैं।
नीलम के पति मनोज पारस नगीना (सुरक्षित) सीट से विधायक हैं जबकि उदयन की पत्नी रुचिवीरा बिजनौर से विधायक हैं। जौनपुर, चंदौली, सीतापुर, गोरखपुर, उन्नाव समेत एक दर्जन से ज्यादा समेत कई जिलों में यही स्थिति हैं।