ललित तिवारी शपथ ग्रहण को लेकर प्रयास कर रहे थे
इसके बाद कारीब पांच महीने पहले अपर जिला जज की कोर्ट ने प्रदीप शुक्ला के निर्वाचन को निरस्त करते हुए ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया। निर्वाचित घोषित होने के बाद से ललित तिवारी शपथ ग्रहण को लेकर प्रयास कर रहे थे।
इसको लिए उन्होंने नगर निगम, जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त कार्यालय और शासन तक पत्राचार किया। जब शपथ ग्रहण नहीं कराया गया तो उन्होंने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में वाद किया। हाईकोर्ट की ओर से शपथ ग्रहण करने के लिए आदेश जारी किए गए।
कोर्ट ने महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए
इसके बाद जब शपथ नहीं कराई गई तो 21 मई को हाईकोर्ट ने महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। इस बीच महापौर कमांड अस्पताल में भर्ती हो गईं। उनका कहना था कि वह बीमार हैं, इसलिए इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं।
महापौर से जब बात की गई तो उन्होंने कहा था कि जब अस्पताल से डिस्चार्ज होंगी, तब कुछ करेंगी। शनिवार को वह अस्पताल से डिस्चार्ज हुईं। इसके बाद रविवार को उन्होंने शपथ ग्रहण कराया। इस बीच सोशल मीडिया पर भाजपा के कुछ पार्षद व अन्य लोगों की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि तृतीय वार्ड में उपविजेता को पार्षद घोषित करने की बजाय वहां पर चुनाव कराया जाना चाहिए था।