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भाजपा के गढ़ में होगी सपा, बसपा और कांग्रेस की परीक्षा, सभी पार्टियों के लिए चुनौती

Tue, 24 Sep 2019 01:14 PM IST
Amulya Rastogi ज्ञान सक्सेना, अमर उजाला लखनऊ
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भाजपा और सपा
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भाजपा विधायक के इस्तीफे से रिक्त हुई राजधानी की कैंट विधानसभा सीट को बीते तीन दशक से मजबूत भगवा गढ़ के तौर पर जाना जाता है। वर्ष 1991 से लेकर 2012 और फिर 2017 में इस सीट पर भाजपा की जीत का झंडा ही फहरा है। 
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सिर्फ 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में ही कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने भाजपा से सीट छीन कर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में रीता बहुगुणा जोशी ने भी पाला बदल भगवा ओढ़ लिया और 2017 के चुनाव में फिर से कैंट सीट भाजपा की हो गई। ऐसे में रीता बहुगुणा जोशी के इलाहाबाद से सांसद चुने जाने के बाद रिक्त हुई सीट के उपचुनाव में बीजेपी के गढ़ में सेंधमारी कर जीत हासिल कर सपा, बसपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगा।

2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा की तरफ से मुलायम कुनबे की छोटी बहू अपर्णा यादव को मैदान में उतारकर भाजपा प्रत्याशी डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को टक्कर देने की कोशिश की गई थी।  हाईप्रोफाइल रहे कैंट सीट के चुनाव में पार्टी से नाराजगी के बावजूद खुद मुलायम सिंह यादव ने अपर्णा के पक्ष में जीत दिलाने को चुनावी सभा तक की। 
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इसके बावजूद भगवा की आंधी के सहारे भाजपा प्रत्याशी डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने लगातार दूसरी बार 33,796 के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। रीता बहुगुणा को जहां 95402 मत मिले वहीं सपा की अपर्णा यादव को 61606 और बसपा के योगेश दीक्षित को 26036 मत ही प्राप्त कर पाए थे। चुनाव मुकाबले में मौजूद 15 में से 12 अन्य प्रत्याशियों को जमानत जब्त करानी पड़ी थी।

अनियोजित विकास, गायब सीवर, जलभराव बड़ी समस्या

कैंट इलाके के ज्यादातर मोहल्ले अनियोजित स्तर पर विकसित होने के कारण विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश इलाके सीवर लाइन विहीन हैं। इसके चलते जलभराव की समस्या पूरे साल रहती है। ज्यादातर इलाकों में दूषित पेयजल सप्लाई के साथ सड़कों व गलियों की स्थिति में बदहाल व गड्ढायुक्त रहती हैं। क्षेत्र को जलभराव की बड़ी समस्या से राहत दिलाने को प्रस्तावित गहरे नाले की खुदाई का कार्य भी बस कुछ चिह्नित स्थानों में पूरा होने के बाद अटका है। 

आलमबाग चौराहा से नटखेड़ा रोड होते हुए मुस्लिम नगर पहुंचने वाली सड़क हो या जयप्रकाश नगर, प्रेम नगर, सिंगार नगर की सड़कें, सभी में गहरे गड्ढे कभी भी देखे जा सकते हैं। क्षेत्र के अधिकांश इलाकों में सफाई की व्यवस्था भी नियमित कार्य न होने के कारण भगवान भरोसे रहती है। वीआईपी रोड पर बंद पड़े नाले को खुलवाने का कार्य अभी तक अधूरा है।
 

कैंट विधानसभा में कब कौन जीता

वर्ष            विजयी प्रत्याशी           पार्टी
2017       रीता बहुगुणा जोशी        भाजपा   
2012       रीता बहुगुणा जोशी        कांग्रेस                    
2007        सुरेश तिवारी               भाजपा 
2002        सुरेश तिवारी               भाजपा 
1996        सुरेश तिवारी               भाजपा
1993        सतीश भाटिया            भाजपा 
1991        सतीश भाटिया            भाजपा
1989        प्रेमवती तिवारी            कांग्रेस
1985        प्रेमवती तिवारी            कांग्रेस
1980        प्रेमवती तिवारी            कांग्रेस (इंदिरा)
1977        कृष्णकांत मिश्र           जनता पार्टी
1974        चरण सिंह                   कांग्रेस
1969        सच्चितानंद                 भारतीय क्रांति दल
1967        बीपी अवस्थी               निर्दल
1962        बालक राम वैश्य         कांग्रेस
1957        बसंत लाल                 कांग्रेस
 
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कांग्रेस व बसपा ने खोले पत्ते, भाजपा-सपा खामोश 

कैंट विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए कांग्रेस व बसपा ने अपने प्रत्याशियों के नाम का खुलासा कर दिया है लेकिन भाजपा व समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों के नाम पर कयासबाजी जारी है। कांग्रेस ने उपचुनाव में कार्य समिति सदस्य व क्षेत्रीय स्तर पर लगातार सक्रिय रहे दिलप्रीत सिंह (डीपी) और बसपा ने वरिष्ठ कार्यकर्ता अरुण द्विवेदी को चुनाव मैदान में उतारने का एलान कर दिया है। 

एक नजर में : कैंट विधान सभा
  • कुल मतदाता      385341
  • पुरुष मतदाता     209870
  • महिला मतदाता   175447
  • तृतीय लिंग          24
  • मतदान केंद्र        344
  • जेंडर रेशियो       प्रति एक हजार पुरुष 836 महिला
  • सर्विस वोटर        428
  • ईपी रेशियो (इलेक्टेड पापुलेशन)   प्रति सौ में 63.90
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