लखनऊ। सीएमओ ऑफिस के अफसरों ने मृत्यु प्रमाणपत्र को अनुमोदन देने में अड़ंगा डाल दिया है। चार से छह माह के मामले लंबित पड़े हैं। ऐसे में किसी की पेंशन फंसी है तो किसी का फंड। परिजन सीएमओ ऑफिस आकर धक्के खा रहे हैं, मगर अफसरों की सेहत पर फर्क नहीं पड़ रहा है।
नए नियम के तहत जन्म व मृत्यु पंजीकरण 21 दिन तक नगर निगम को जारी करने का अधिकार है। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी करने के लिए सीएमओ से अनुमोदन लेना पड़ता है। इसके बाद ही नगर निगम प्रमाणपत्र जारी करता है।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि एक माह का बैकलॉग लंबित हैं। कर्मचारियों को इसका निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। बचे हुए आवेदन का निस्तारण इसी माह कर दिया जाएगा।
100 से अधिक आवेदन लंबित पड़े
सीएमओ कार्यालय में अनुमोदन के लिए 100 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं। विभाग पर हर दिन केवल आठ से दस मामलों को ही अनुमोदन देने का आरोप है। नगर निगम की ओर से नए मामले आने के बाद बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कर्मचारी उसका समय से निस्तारण नहीं कर पा रहे हैं।
केस - 1 : छह महीने पहले किया था आवेदन
सरोजनीनगर के जगमोहन की मृत्यु चार जनवरी को हो गई थी। छह माह पहले बेटे ने मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए नगर निगम में आवेदन किया था, जिसे अनुमोदन के लिए सीएमओ ऑफिस भेजा गया था, मगर अफसर छह माह बाद भी अनुमोदन नहीं दे पाए हैं। इसे लेकर परिजन सीएमओ ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, मगर वहां से उन्हें टरकाया जा रहा है।
केस 2 : चार महीने से लगा रहे चक्कर
प्राग नारायण रोड, हजरतगंज निवासी शांति देवी की मृत्यु सात अप्रैल को हुई थी। परिजनों ने 17 जुलाई को मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया। करीब चार माह बीत गए, मगर अभी तक सीएमओ ऑफिस से अनुमोदन नहीं मिल सका है। परिजन दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उन्हें जल्द आवेदन पर मुहर लगाने की बात कहकर लौटाया जा रहा है।
केस 3: छत्तीसगढ़ से दौड़ लगा रही बेटी
छत्तीसगढ़ बिलासपुर के रहने वाले राजू गुप्ता 23 अगस्त को केजीएमयू की लॉरी ओपीडी में दिखाने गए थे। वहां कुर्सी पर बैठकर इंतजार कर रहे थे, तभी दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। बेटी सोना ने नगर निगम जोन एक में मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, जिसे 24 सितंबर को नगर निगम ने अनुमोदन के लिए सीएमओ कार्यालय भेजा था, मगर अनुमोदन अभी तक नहीं मिल सका है। सोना अनुमोदन के लिए छत्तीसगढ़ से आकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, मगर जिम्मेदारों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा।