भील और कोल समेत उत्तर प्रदेश की कई जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलेगा। जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार इस पर संजीदगी से विचार कर रही है।
नेपाल बॉर्डर पर निवास करने वाली थारू और बुक्सा जनजातियों की बेहतरी के लिए और भी अधिक काम करने की योजना का भी उन्होंने खुलासा किया। इसके लिए सरकार धन की व्यवस्था करेगी।
राजधानी में मंगलवार को एक कार्यक्रम में भाग लेने आए केंद्रीय मंत्री उरांव ने अपने विभाग की भावी योजनाओं को 'अमर उजाला' के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि यूपी में फिलहाल अनुसूचित जनजातियों की आबादी काफी कम है लेकिन कई ऐसी जातियां हैं जो जनजाति में शामिल होने की शर्तें पूरी करती हैं।
ये जातियां बरसों से खुद को जनजाति में शामिल करने की मांग कर रही हैं। इनमें भील, कोल और पठानकोल जातियां प्रमुख हैं। जनजाति में शामिल होने की मांग कर रहीं कई जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल कर लिया गया है, मगर इतने भर से उन्हें उनका वाजिब हक नहीं मिल सकता।