आटा चक्की से हर दिन दो हजार की आमदनी
झांसी के रास्ते हम जालौन पहुंचे। मोहम्मदाबाद से आगे बढ़ने पर आटा चक्की और स्पेलर चलता दिखा। इसके संचालक संजय सिंह मिले। वे बताते हैं कि 18 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवाया। करीब सात लाख खर्च हुए। पहले इंजन से हर दिन पांच सौ का डीजल लगता था। अब सोलर से पानी का पंप, आटा चक्की और स्पेलर चलता है। गांव के ही तीन लोगों को काम पर रखा है। हर दिन करीब दो हजार की बचत हो रही है।
हाईवे के हर ढाबे पर सोलर प्लेट
झांसी- ललितपुर हाईवे पर तालबेहट के आसपास कई होटल व ढाबे हैं। ज्यादातर के छत पर सोलर प्लेट दिखती हैं। होटल संचालक रितेश बताते हैं कि बिजली बिल हर माह ढाई से तीन हजार आता था। शाम के वक्त आंख मिचौनी अलग से। ऐसे में 10 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवाया।
करीब 35 फीसदी की बचत होती है। पांच साल में बैटरी बदलवानी होती है। पिछले तीन साल के अंदर हाईवे के हर ढाबा, होटल संचालक ने सोलर लगवा लिया है। बुंदेलखंड के सात जिलों में 55 मेगावाट के आवासीय रूपटॉप सोलर पैनल लगे हैं। सरकारी भवनों पर 19 मेगावाट के रूपटॉप सोलर पैनल लगे हैं।पीएम कुसुम योजना में 8 मेगावाट के सोलर पंप लगाए गए हैं।
प्रदेश में सोलर पंप की स्थिति
प्रदेश में वर्ष 2025-26 में कुल 40521 सोलर पंप लगाने की तैयारी है। इसमें 30 फीसदी से अधिक बुंदेलखंड में लगाए जाएंगे। अभी तक 5483.98 लाख यूनिट प्रति वर्ष ऊर्जा की बचत हो रही है। इसी तरह 1.26 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष कार्बन उत्सर्जन में कमी हुई है। सोलर पंपों की स्थापना से डीजल पंप सेट को परिवर्तित करते हुए कुल 877.50 लाख लीटर डीजल प्रतिवर्ष बचत हो रही है। किसानों सोलर पंप पर टेंडर मूल्य का 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।