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युवराज के आंगन में कैसे खिलेगी BJP की तुलसी?

Thu, 10 Apr 2014 06:48 PM IST
रमाकांत तिवारी/ अमर उजाला, लखनऊ
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चैत्र मास की झुलसती दुपहरी में अमेठी के आंगन में उतरी ‘तुलसी’ यानि स्मृति ईरानी के समक्ष जड़ जमाने की बड़ी चुनौती है।
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उन्हें न केवल अब तक निष्क्रिय पड़े कार्यकर्ताओं को अग्रिम मोर्चे पर खड़ा दिखाना होगा बल्कि कम समय में जनता के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति भी साबित करनी होगी।

खुद भाजपाई दबे स्वर में इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि पार्टी को उनके नाम की घोषणा और पहले करनी थी।

वैसे तो अमेठी की जनता 1977 से ही अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में दिग्गज फिल्मी कलाकारों को देखती-सुनती आई है लेकिन पहली बार टेलीविजन कलाकार स्मृति ईरानी बतौर प्रत्याशी यहां मैदान में हैं।
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राहुल दस साल से तो विश्वास ढ़ाई महीने से

चुनाव से ठीक एक माह पहले स्मृति ईरानी अमेठी के आंगन में उतर चुकी हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस से राहुल गांधी मैदान में हैं। राहुल 10 साल से अमेठी के सांसद हैं।

स्मृति ईरानी के दूसरे प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास ढाई महीने से लगातार क्षेत्र में जमे हैं।

विपक्षियों के मुकाबले जाहिर तौर पर स्मृति ईरानी के पास वक्त कम है।

उनका सकारात्मक पक्ष यह है कि पढ़े-लिखे तबके में वे पहचान की मोहताज नहीं हैं। हालांकि इन सबके बीच स्मृति के समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
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स्‍मृति ने पैदा किया उत्साह

1977 में जनता पार्टी की लहर को छोड़ दिया जाए तो पूरे देश में दिखने वाली वीपी सिंह के जनता दल और भाजपा की रामलहर की बयार भी अतीत में यहां थम चुकी है।

आमतौर पर भाजपा की ओर से प्रत्याशी चयन को लेकर खानापूरी किए जाने से संगठन में भी तेवर नहीं दिखता। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में अग्रिम मोर्चे पर लड़ता हुआ दिखना होगा।

भाजपाई भी इस बात को दबे स्वर से स्वीकार करते हैं कि अमेठी जैसी हाई प्रोफाइल सीट पर स्मृति ईरानी के नाम की घोषणा में विलंब किया गया।

इन परिस्थितियों में स्मृति ईरानी अमेठी के रण में क्या करिश्मा दिखा पाएंगी यह नतीजों के बाद ही तय होगा लेकिन फिलहाल लंबे वक्त बाद यहां भाजपाइयों में उत्साह दिख रहा है।
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