सूबे के सरकारी स्कूलों में शिक्षक कब स्कूल आते हैं, उनके जाने का समय क्या है। बच्चों को कितना पढ़ाते हैं।
उन्हें छुट्टी दी जाए या नहीं। इसकी जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) को देने की तैयारी है।
उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर एसएमसी को और सक्रिय करने की तैयारी है।
इन दोनों प्रदेश के एक-एक शहरों के दौरे पर गई अधिकारियों की टीम ने सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
बेसिक शिक्षा मंत्री के समक्ष शीघ्र ही इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अंतिम निर्णय कर लिया जाएगा।
बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और सरकार योजनाओं में धांधली न हो इसके लिए प्रत्येक स्कूलों की एसएमसी बनाई गई है।
इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं। इसमें 11 बच्चों के अभिभावक होते हैं और एक अभिभावक को इसका अध्यक्ष चुनाव जाता है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत चल रही योजनाओं का लाभ बच्चों को पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। इसलिए सर्व शिक्षा अभियान का राज्य परियोजना निदेशालय एसएमसी को और सक्रिय करना चाहती है।
गौरतलब है कि विभागीय अधिकारियों की दो टीमों को मुंबई और कोलकाता भेजा गया था। इन्हें सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना अधिकारियों से मिलकर वहां के स्कूलों का दौरा कर एसएमसी की भूमिका देखनी थी।
दोनों शहरों में स्कूल संचालन में एसएमसी की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारियों ने इसके आधार पर ही रिपोर्ट दी है।