स्मारकों के निर्माण में मनमाना रेट वसूलने वाले ठेकेदारों की इसी ऊंची राजनीतिक पहुंच थी कि अफसर उन्हें ही खुश करने की कोशिश में रहते थे।
यही वजह थी कि कंसोर्टियम की 20 फर्मों को ही अधिकतर आपूर्ति के आदेश दिए गए। दिखावे के लिए जरूर कुछ ठेकेदारों को मामूली कामों का ठेका दे दिया गया।
विजिलेंस ने इस प्रकरण की अभी तक हुई जांचों की रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला है। विवेचना के शुरुआती दौर में ही इन सभी फर्मों के संचालकों से पूछताछ की जाएगी।
विजिलेंस के सूत्रों का कहना है कि स्मारक व उद्यान के निर्माण कार्य से संबंधित ठेके लेने वाली फर्मों के खातों की पड़ताल भी की जाएगी।
यह पता किया जाएगा कि भुगतान मिलने से पहले इनके खातों से कितनी निकासी की गई और भुगतान के बाद कितनी निकासी हुई।
वहीं, विजिलेंस इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों व अभियंताओं के खातों की भी जांच करेगी ताकि यह पता किया जा सके कि किस अधिकारी को किस ठेकेदार से कितना कमीशन मिला। इस सिलसिले में पहले ठेकेदारों से पूछताछ होगी और बाद में लोकसेवकों से।
यह सारी कवायद इसलिए की जानी है, क्योंकि लोकायुक्त ने अपनी जांच के बाद इन फर्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही उनसे वसूली करने की भी सिफारिश की हुई है। विजिलेंस खातों की जांच कर लेन-देन के साक्ष्य हासिल करना चाहती है।