दल छोटा है लेकिन पंगा बड़ा। वेस्ट यूपी में जनाधार रखने वाले दल के प्रदेश मुख्यालय में कोल्ड वार जैसी स्थिति है।
सूबे में दल कमान संभालने वाले पूर्व मंत्री और प्रवक्ता से प्रमोट कर राष्ट्रीय सचिव बनाए गए नेता एक दूसरे को आखों नहीं सुहा रहे। आलम यह है कि एक नेता दफ्तर में होते हैं तो दूसरे ऑफिस के बाहर।
बात यहीं तक रहती तो ठीक था, एक दूसरे को नीचा दिखाने में भी पीछे नहीं हैं। बेचैनी कार्यकर्ताओं में भी हैं। पार्टी के प्रति वफादारी दिखाएं या नेता के प्रति। विवाद केंद्रीय मंत्री पिता और सांसद पुत्र (हाईकमान) तक पहुंच गया है।
वजह जो भी हो, मसले का हल निकालने के बजाए हवा में उड़ने वाले सुप्रीमो और उनके नायाब युवा सांसद ने भी सीधे तौर पर दखल से परहेज ही बरता।
खैर, मामला पार्टी और मीडिया में खूब चर्चा में है। देखना है कि युद्ध विराम होता है या जंग अगले पड़ाव तक पहुंचती है।