केजीएमयू के ओरल पैथालॉजी विभाग में डेढ़ महीने तक कोई डेट उपलब्ध नहीं है। बुधवार को ओपीडी के सामने पहुंचे शुक्लागंज निवासी रामचरण ने बताया कि बेटे विकास को दिखाने आए हैं।
31 तक के सभी स्लॉट फुल हैं। कोरोना की निगेटिव जांच रिपोर्ट भी जरूरी है। पंजीकरण और निगेटिव जांच रिपोर्ट न होने से ओपीडी में जाने नहीं दिया गया।
झांसी निवासी विवेक को सिर में ट्यूमर है। स्थानीय डॉक्टरों ने केजीएमयू जाने की सलाह दी। पर केजीएमयू की ओपीडी में 31 अगस्त तक सभी स्लॉट भरे हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके आगे स्लॉट बुक करने का विकल्प पोर्टल पर नहीं आ रहा है।
ऐसे में परेशान होकर वे ओपीडी पहुंच गए। ओपीडी में उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। बाद में उनका रजिस्ट्रेशन किया गया, पर तारीख अगले महीने मिलने की बात कही गई।
केजीएमयू में बुधवार को हरदोई निवासी रामआसरे ने बताया कि वे अपने बच्चे को मेडिकल गैस्ट्रोलॉजी विभाग में दिखाना चाहते हैं।
विभाग की ओपीडी में दिखाने के लिए ऑनलाइन स्लॉट उपलब्ध नहीं है। पोर्टल पर सात अगस्त तक सभी स्लॉट भरे हुए नजर आ रहे हैं। इसके बाद की तारीख में पंजीकरण का विकल्प उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे यहां पर स्थिति देखने आए हैं।
केजीएमयू के ऑर्थोपेडिक डेंटो-फेशियल एंड ऑर्थोपेडिक विभाग की ओपीडी के 31 अगस्त तक के सभी स्लॉट भरे हुए हैं।
ऑनलाइन स्लॉट भरा होने की वजह से बिस्वां निवासी रामनरेश अपने बच्चे को दिखाने के लिए सीधे ओपीडी पहुंच गए। पंजीकरण न होने से गार्ड ने उन्हें भीतर जाने नहीं दिया।
केजीजीएमयू की ओपीडी में इस वक्त ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण के बाद सीमित संख्या में ही मरीज देखे जा रहे हैं। कॉर्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपैडिक, ओरल पैथालॉजी और गैस्ट्रो समेत काफी विभागों की ओपीडी में अगस्त तक सभी स्लॉट भरे हुए हैं।
इसके बाद पंजीकरण का विकल्प नहीं है। ऐसे में मरीजों को वेटिंग तक की सुविधा नहीं मिल रही है। केजीएमयू प्रशासन ने कोरोना की दूसरी लहर के चलते 12 अप्रैल से ओपीडी सेवा बंद कर दी थी।
इस दौरान सर्जिकल आंकोलॉजी, क्लीनिकल हीमैटोलॉजी, रेडिएशन आंकोलॉजी, इंडोक्राइन सर्जरी, मेडिकल आंकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स विद नियोनेटल केयर, डायलिसिस के लिए नेफ्रोलॉजी ओपीडी, एचआईवी मरीजों के लिए एआरटी सेंटर व फीवर क्लीनिक की ओपीडी चलाई जा रही थीं।
संस्थान ने 14 जून से ओपीडी सेवा फिर से शुरू कर दी है। इसमें आरपीटीसीआर जांच की अनिवार्यता तथा सामान्य विभागों में 150 तथा सुपर स्पेशियलिटी विभागों में 100 मरीजों की अधिकतम संख्या तय की गई है। इससे काफी मरीजों को ओपीडी सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
1500 के भीतर खत्म हो रही दस हजार वाली ओपीडी
केजीएमयू में सामान्य दिनों की ओपीडी सात से 10 हजार मरीज रोज की होती है। इस वक्त आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता तथा अधिकतम संख्या की सीमा होने की वजह से यह 1500 का आंकड़ा भी नहीं पार कर पा रही है।
कई विभागों में आसानी से मिल रहा स्लॉट
केजीएमयू में काफी विभागों में ओपीडी की सुविधा नहीं मिल पा रही है तो वहीं, कई विभाग ऐसे हैं, जिनमें आसानी से स्लॉट मिल रहा है। इन विभागों में आयुष, इंडोक्राइन सर्जरी, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट, वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, रेडियोथेरेपी, यूरोलॉजी आदि विभाग शामिल है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पांच अगस्त से तो मेडिसिन विभाग में 22 जुलाई, सर्जिकल गैस्ट्रोलॉजी जैसे विभाग में छह अगस्त से स्लॉट उपलब्ध है।
कोविड के इलाज का प्रमुख केंद्र
केजीएमयू कोविड महामारी के इलाज का प्रमुख केंद्र रहा है। इसलिए मरीज, तीमारदार तथा चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरटीपीसीआर की निगेटिव जांच रिपोर्ट तथा अधिकतम संख्या की सीमा तय की गई है। मरीज ऑनलाइन बुकिंग करके अपनी बारी आने पर ओपीडी में दिखा सकते हैं। जो मरीज ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते हैं उनको फोन पर भी यह सुविधा दी जाती है।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू