फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्लीपर बस अग्निकांड: 19 चालान के बावजूद भर रही थी फर्राटा, भ्रष्ट अफसरों की लापरवाही से गई नौ लोगों की जान

Fri, 25 Sep 2026 10:45 AM IST
Bhupendra Singh नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ

सार

यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस अग्निकांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। 1.75 लाख के 19 चालान के बावजूद बस फर्राटा भर रही थी। इंश्योरेंस भी नहीं था। भ्रष्ट अफसरों की मेहरबानी से 9 लोगों की जान चली गई। आगे पढ़ें पूरी खबर... 
विज्ञापन
accident on yamuna expressway - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे का शिकार हुई और नौ यात्रियों की जान चली गई। बस पर 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे। बस अनफिट थी और इंश्योरेंस भी नहीं था। इसके बावजूद एक के बाद एक आरटीओ क्षेत्रों से गुजरते हुए बस का संचालन हो रहा था। ऐसी बसें खुलेआम हादसों को अंजाम दे रही हैं।

विज्ञापन


इसके जिम्मेदार लालची बस संचालक, उनका अड़ियल प्रबंधन और परिवहन विभाग के लापरवाह अफसर हैं। राज कल्पना ट्रेवल्स की बस छतरपुर जिले के बिजावर विधानसभा क्षेत्र के है। हो दियोरान निवासी राजकुमार शर्मा की बस दिल्ली से महोबा जा रही थी। यमुना एक्सप्रेसवे पर बस हादसे का शिकार हो गई। बस पर चालान थे। सुरक्षा उपकरण नहीं थे।

फायर सेफ्टी के इंतजाम भी नाकाफी थे। इससे पूर्व लखनऊ के मोहनलालगंज में बस हादसे का शिकार संख्या हुई थी। बस अनफिट थी। बस यूपी-17 एटी 6372 बिहार के बेगुसराय से दिल्ली जा रही थी। इसमें पांच लोगों की जान गई थी।

लंबी दूरी की बसें सिंगल ड्राइवर के भरोसे

बिहार से पंजाब, दिल्ली, राजस्थान आदि जगहों के लिए लंबी दूरी की बसें सिंगल ड्राइवर के भरोसे चलाई जाती हैं, जबकि इनमें डबल ड्राइवर होने चाहिए। बसें पूरी रात चलती हैं। कई बार एक झपकी आने पर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन बस ऑपरेटर सिर्फ कमाई पर फोकस करते हैं। लीपर बसों में सुरक्षा के लिहाज से तमाम निर्देश जारी हो चुके हैं, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर उनका पालन नहीं करवा पाए हैं। मसलन, स्लीपर कोच में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम डिवाइस (एफडीएसएस) लगाई जाए। बसों में 10 किलोग्राम के अग्निशमन यंत्र है।

फिटनेस का खेल

बसों के परमिट, फिटनेस आदि में परिवहन विभाग के अफसर लापरवाह रवैया अपनाते हैं। ऐसे ही गोरखपुर के एक मोटर कोकल इंस्पेक्टर पर गाज गिर चुकी है, जिन्होंने अनफिट बस को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया था। प्राइवेट फिटनेस सेंटर एटीएस भी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। 

विज्ञापन


लखनऊ जोन के आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने बताया कि स्लीपर बसें पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से आगरा और फिर यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से बाहर निकल जाती हैं। चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं। जुर्माना भी लगता है। बस ऑपरेटर लापरवाही बरतते हैं। बसों से छेड़छाड़ करते हैं, जो हादसे की वजह भी बनती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें