एसपी ने बताया कि टर्टल सर्विलांस अलायंस (टीएसए) के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह, अरुणिमा सिंह और अन्य सदस्यों ने मांस के टुकड़ों और मृत कछुए के पैर से इसकी प्रजाति की पहचान इंडियन सॉफ्ट सेल टर्टल के रूप में की। इसका प्रचलित नाम कटहवा है। यह भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अधिसूचित है।
इसकी जांच के लिए सैंपल देहरादून भेजा जा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय एजेंसियों के दिल्ली मुख्यालय को भी सूचित किया गया है। एसपी ने बताया कि वाइल्डलाइफ क्राइम डिवीजन, इंटरपोल सिंगापुर ऑफिस ने भी ऐसी तस्करी होना पहली बार बताया है।