यूपी में सक्रिय छह प्रमुख वाम दल आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी समेत सभी छह दलों के नेताओं ने साझा मंच से इसकी घोषणा की। इस मौके पर वामपंथी नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर तीर चलाए।
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उन्होंने कहा कि नोट बंद कर देने से विदेश में जमा काला धन हिंदुस्तान वापस नहीं आ जाएगा। यूपी चुनाव में फायदे के लिए भाजपा नित नई चालें चल रही है, मगर किसान और मजदूर उसके मंसूबे को सफल नहीं होने देंगे। उत्तर प्रदेश का चुनाव देश को नई दिशा देगा।
राजधानी के लक्ष्मण मेला मैदान में बुधवार को भाकपा, माकपा, भाकपा (माले), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और एसयूसीआई(सी) की ओर से आयोजित सभा में भाकपा के सचिव कामरेड डी. राजा ने कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ कॉर्पोरेट घरानों का विकास कर रही है।
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'भ्रम पैदा करने के लिए बंद किए हैं नोट'
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा, काला धन को लेकर चुनाव में भ्रम पैदा करने के लिए 500 और 1000 के नोट बंद किए गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भी 1000 का नोट चलन से बाहर किया था, लेकिन उससे काले धन पर रोक नहीं लगी।
उन्होंने कहा कि यह सरकार असहमति रखने वालों को देशद्रोही कह रही है। लाल झंडे थामे नेता ही ऐसे हैं, जिनके ऊपर आज तक भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं लगा। इसलिए भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ वे ही निर्णायक लड़ाई लड़ सकते हैं।
माकपा के महासचिव कामरेड सीताराम येचुरी ने कहा कि देश में किसानों की आत्महत्या के मामलों में 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। न्यूनतम दाम न मिल पाने से उनका जीवन दुश्वारियों से भर गया है।
सरकार के पास किसान का कर्ज माफ करने के लिए पैसा नहीं है, पर पूंजीपतियों के 1 लाख 12 हजार करोड़ के कर्ज माफ कर दिए गए हैं। एक साल में दो करोड़ रोजगार देने का दावा करने वाली सरकार अब तक महज 1.35 लाख रोजगार ही दे पाई है। अलबत्ता खरबपतियों की संख्या 55 से बढ़कर 100 हो गई है। काला धन रखने वालों के नाम सार्वजनिक न करने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाने वाले काला धन को खत्म करने का नाटक रचते हैं।
‘कश्मीर रीडर’ अखबार पर दो अक्तूबर से पाबंदी
भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि काला धन सिर्फ कैश में ही नहीं है। रियल एस्टेट, शेयर मार्केट, अवैध कारोबारों और कारखानों के अलावा न जाने कहां-कहां यह लगा हुआ है। नोट पर पाबंदी से मुसीबत आम लोगों की होगी। अपने नोट बदलने के लिए उन्हें धक्के खाने पड़ेंगे।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब नोट बंद करने के मुद्दे को लेकर भी भाजपा चुनावी फायदा लेना चाहेगी। चुनाव को देखते हुए लव जेहाद जैसे समाज को बांटने वाले मुद्दे उछाले जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि गाय के जीन और इंसान के जीन में 80 फीसदी समानता है, लेकिन इन्हें नोएडा में मार दिए गए इकलाख के जीन और हिंदुओं के जीन में कोई समानता नहीं दिखती। कश्मीर रीडर अखबार पर तो दो अक्तूबर से पाबंदी लगा रखी है।
फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता देवव्रत विश्वास ने कहा कि कारगर रणनीति न होने के कारण हम उत्तर प्रदेश में पैठ नहीं बना पा रहे हैं। यूपी चुनाव आने वाले हैं, इसलिए सारे नेता यहीं डेरा डालें।
सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) के नेता अरुण कुमार, माकपा के हीरालाल यादव, बीएन राय और बीएल भारती ने भी विचार रखे।