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Lucknow News: ट्राॅमा सेंटर के कैजुअल्टी वार्ड में 80 मरीजों के लिए छह डॉक्टर

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ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की भीड़।
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लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों का बोझ और डॉक्टरों की भारी कमी ने इलाज की व्यवस्था चरमरा दी है। कैजुअल्टी वार्ड में तैनात मुट्ठी भर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के भरोसे सैकड़ों मरीजों की जान है, जिसके चलते गंभीर मरीजों को भी इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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ट्रॉमा सेंटर के कैजुअल्टी वार्ड में कहने को तो 42 बेड हैं, लेकिन शुक्रवार दोपहर यहां 80 से अधिक मरीज भर्ती थे। हालात यह रहे कि बेड भर जाने के कारण करीब 40 से 50 मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर ही किया जा रहा है। यह स्थिति केवल शुक्रवार की ही नहीं थी, बल्कि आए दिन यही हालात नजर आते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, ट्रॉमा सेंटर में हर दिन 200 से 250 नए मरीज आते हैं, जिन्हें कैजुअल्टी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद संबंधित विभागों में शिफ्ट किया जाना होता है, लेकिन मैनपावर की कमी इस प्रक्रिया में बड़ी बाधा बनी हुई है।

डॉक्टरों पर भारी दबाव

वर्तमान में 80 से ज्यादा गंभीर मरीजों की जिम्मेदारी महज 6 से 7 रेजिडेंट डॉक्टरों और 8 नर्सिंग स्टाफ पर है। मरीजों की संख्या के मुकाबले यह संख्या बेहद कम है। डॉक्टरों पर काम का इतना अधिक बोझ है कि वे चाहकर भी हर मरीज को समय पर अटेंड नहीं कर पा रहे हैं, जिसका सीधा असर इलाज की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
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इस अव्यवस्था पर ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह का कहना है कि स्थिति सुधारने के लिए नए रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल व्यवस्था को पटरी पर रखने के लिए दूसरे विभागों से रेजिडेंट डॉक्टरों को बुलाकर काम चलाया जा रहा है, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।

ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की भीड़।

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