अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए कानून सख्त किया गया, घटनाओं के बाद एसआईटी गठित की गई, अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाया गया लेकिन धंधा है कि बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अवैध शराब के कारोबार ने लखनऊ और फिरोजाबाद में आधा दर्जन से अधिक लोगों को अपना निवाला बना लिया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सख्त कानून के बाद भी अवैघ शराब का कारोबार बंद क्यों नहीं हो रहा है और अवैध शराब के कारोबार की रोकथाम के लिए जो सिफारिशें की गई थीं, उन सिफारिशों का क्या हुआ?
पिछले वर्ष फरवरी माह में सहारनपुर और कुशीनगर में जहरीली शराब पीने से 100 से अधिक लोगों की जानें गई थीं। घटना की तह तक पहुंचने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन एडीजी रेलवे संजय सिंघल के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन कर जांच करने को कहा था और भविष्य में घटना न होने पाए इसके लिए सुझाव मांगे गए थे।
जड़ तक हो विवेचना, पर्यवेक्षण हो बेहतर
एसआईटी ने अपनी सिफारिश में कहा था कि अवैध शराब पकड़ी जाती है तो कई बार केवल कैरियर पर ही कार्रवाई करके केस खत्म कर दिया जाता है। जबकि ऐसे कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए तह तक जाना जरूरी होता है। ऐसे मामलों का पर्यवेक्षण भी सही ढंग से नहीं किया जाता।
रोकी जाए मिथाइल की कालाबाजारी और चोरी
एसआईटी ने अपने सुझाव में कहा था कि मिथाइल की अधिक मात्रा ही जहर बन जाती है। ऐसा बिना जानकारी के प्रयोग करने से होता है। सप्लाई के दौरान मिथाइल की चोरी ट्रकों के ड्राइवरों से मिलीभगत कर की जाती है। इसी मिथाइल से सस्ती शराब बनती है। इसे रोकने के लिए भी एसआईटी ने सुझाव दिए थे।
पीड़ित लोगो के इलाज के लिए बनाई जाए गाइडलाइन
एसआईटी ने जहरीली शराब से पीड़ित लोगों के इलाज के किसी तरह की गाइडलाइन न होने की बात कही थी। ऐसे मरीजों से कैसे निपटना है इसकी जानकारी ही स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं होती, जिससे मौत के आंकड़े बढ़ जाते हैं। जरूरी है कि इसके लिए एक विस्तृत गाइडलाइन बनाकर ब्लॉक स्तर पर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जाए।
ठेकेदारों को ही बनाएं अपना मुखबिर
एसआईटी ने जांच के बाद कुछ सिफारिशें की थीं जिसे आज तक लागू नहीं किया जा सका। अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए एसआईटी ने शराब के सरकारी ठेकेदारों के साथ रेगुलर बैठक आयोजित करने को कहा था। ठेकेदारों को पता होता है कि क्षेत्र में कौन-कौन अवैध शराब का कारोबार कर रहा है। क्योंकि शराब की बिक्री का सीधा असर उनकी दुकानों पर पड़ता है, इस लिए वह आसानी से बता भी देते हैं।
शराब के दाम कम करने का भी था सुझाव
पड़ोसी राज्यों में शराब काफी सस्ते दाम में उपलब्ध होती है। ऐसे में वहां से तस्करी बढ़ जाती है। इसके लिए एसआईटी ने सुझाव दिया था कि दूसरे राज्यों की सीमा से सटे जिलों में पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय की अक्सर कमी रहती है। ऐसे में नियमित रूप से माह में कम से कम एक बार और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर तीन माह में एक बार बैठक जरूर होनी चाहिए।