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CPMT पेपर लीक मामला: पढ़िए, पूरी कहानी

Tue, 24 Jun 2014 09:28 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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सीपीएमटी पेपर लीक मामले में केजीएमयू प्रशासन को सूचनाएं हल्के में लेना भारी पड़ गया। फॉर्म भरने के दौरान ही गाजियाबाद सेंटर को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म था।
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सूचना थी कि सीपीएमटी ब्रेक करना है तो गाजियाबाद सेंटर ले लो। इस सेंटर का पेपर लीक होने का रेट 20 लाख रुपये खोला गया था। यही नहीं, केजीएमयू के एक शिक्षक का भी इस मामले में नाम आ रहा है।

पढ़ें- सरकार ने बनाई कमेटी, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

इसके बार में शासन और केजीएमयू प्रशासन को पत्र भेजकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी। इन सभी सूचनाओं को केजीएमयू और सीपीएमटी ने नजरअंदाज किया। इसका खामियाजा 1.09 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ा।
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सूचना को नहीं लिया गंभीरता से

उत्तर प्रदेश कम्बाइंड प्री मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी-2014) हमेशा से ही संवेदनशील रहा है। केजीएमयू के कई फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा कराने वालों को छोटी सी छोटी सूचनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए था।

यदि गाजियाबाद सेंटर को लेकर अफवाह भी फैली थी तो सीपीएमटी सेल को वहां थोड़ी सतर्कता बरतनी चाहिए थी। हॉस्टल तक में ये सूचनाएं थी कि जिसे भी सीपीएमटी एडमिशन चाहिए वह गाजियाबाद का सेंटर फार्म में भरे।

इसके बावजूद किसी भी अधिकारी ने इन सूचनाओं को क्रॉस चेक करने की जहमत नहीं उठाई। गाजियाबाद में पेपर के बक्से के साथ छेड़छाड़ के बाद अब इसे सही माना जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि केजीएमयू ही नहीं कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भी इस तरह के ऑफर छात्रों तक पहुंचाए गए।

कई शिक्षकों का नाम भी आ रहा सामने

गाजियाबाद सेंटर को हॉट सीट बनाने वाले रैकेट में केजीएमयू के कई चिकित्सकों का नाम भी सामने आ रहा है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो स्वपना सिंह इंदिरा नगर के नाम से एक पत्र मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा और केजीएमयू के कुलपति को भेजा गया था।

इस पत्र में भी केजीएमयू के कई शिक्षकों का हवाला देते हुए सीपीएमटी की सीटों को 20-20 लाख रुपये में बेचने की जानकारी दी गई थी।
इनमें एक शिक्षक पर रेजीडेंट होने के दौरान भी एमबीबीएस में प्रवेश कराने के नाम पर लाखों रुपये वसूलने का आरोप लगा

इस पत्र को शासन ने संज्ञान लेकर केजीएमयू को जानकारी दी लेकिन इसके बाद इसे भी रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया। अब पेपर लीक होने के बाद, छोटी से छोटी बातों का संज्ञान ले रहा है।

केजीएमयू वीसी ने अपनी टीम पर जताया भरोसा

केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत ने सीपीएमटी सेल के चीफ को-ऑर्डिनेटर प्रो. एके सिंह सहित सभी सदस्यों पर पूरा भरोसा जताया है।

उनका कहना है कि सभी ने अपना 100 फीसदी इस परीक्षा को सफल बनाने में दिया है। उनकी तरफ से कोई कमी नहीं रखी गई, जिस तरह से परीक्षा को सफल बनाने में लोग जुटते हैं।

उसी तरह से सुरक्षा व्यवस्था को भेदने वाले भी सक्रिय हो जाते हैं। दुर्भाग्य है कि इस बार गलत लोग सफल होते लग रहे हैं।

अब तक पकड़े गए मुन्ना भाई

-2004 में सीबीआई ने एआईपीजीएमईई-2002 में प्रश्न-पत्र लीक मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक चिविवि का शिक्षक था।
-2005 में सीपीएमटी प्रश्न पत्र लीक मामले में 12 डॉक्टर और एक एमबीबीएस कर रहे छात्र को गिरफ्तार किया था।
-2005 में ही सीएसएमएमयू के तीन छात्रों को एक छात्र के अपहरण के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
-2008 में पंजाब पुलिस ने चिविवि के 2007 बैच के अर्जदेव नाम के छात्र को गिरफ्तार किया। यह छात्र पीएमटी में सॉल्वर के रूप में बैठा था।
-2008 में सीपीएमटी परीक्षा में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने वाले एक गैंग के 30 लोगों को पकड़ा गया

दो दिन पहले पहुंच गए थे प्रश्न पत्रों के बक्से

सीपीएमटी सेल के सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद के एसीबीआई में 19 जुलाई और इलाहाबाद बैंक में 20 जुलाई को पेपर पहुंचा दिए गए थे। प्रश्न पत्रों को बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रिंटर की थी।

सूत्रों की मानें तो परीक्षा के दिन ही लखनऊ से गए सीपीएमटी सेल की तरफ से तैनात नोडल अधिकारी प्रो.आर.के.दीक्षित ने बॉक्स को क्षतिग्रस्त देखा था।

इसके बाद ही पूरे मामला सामने आ गया। बताया जा रहा है कि यदि बॉक्स लॉकर रूम में रखने के बाद उसकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती गई।

क्योंकि बॉक्स यदि पहले से क्षतिग्रस्त होते तो उसे अधिकारी रिसीव नहीं करते। ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि लॉकर रूम में ही प्रश्न पत्रों के बॉक्सों के साथ छेड़छाड़ की गई है।

आरबीआई से सर्टिफाइड प्रेस ने छापे थे पेपर

सीपीएमटी-2014 के प्रश्न पत्र रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से सर्टिफाइड प्रेस से छपवाए गए थे।

दक्षिण भारत के इस प्रिंटर को सिक्योरिटी प्रेस का दर्जा प्राप्त है। इसी प्रिंटर को ही सभी परीक्षा केंद्रों तक प्रश्न पत्र पहुंचाने थे।

सीपीएमटी सेल के चीफ को-ऑर्डिनेटर प्रो. एके सिंह ने दावा किया कि इस प्रेस में बैंकों की चेक से लेकर सरकारी गजट और विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्न पत्र छपते हैं।

तीन सील में पेपर को रखा गया था। इसके बाद बक्सों के अंदर रखे प्रश्न पत्र भी विशेष सील प्रूफ लिफाफों में रखे गए थे। इन सभी सील को तोड़ने के बाद दोबारा रिपेयर करना भी असंभव है।

2015 में ऑनलाइन हो सकता है सीपीएमटी

सीपीएमटी-2014 में मुंह की खाने के बाद कुलपति प्रो. रविकांत ने अब इस परीक्षा को ऑनलाइन कराने की योजना पर कार्य करना शुरू कर दिया है।

उनका दावा है कि जबकि कैट, एम्स, मैट जैसी परीक्षाएं ऑनलाइन हो सकती हैं तो सीपीएमटी क्यों नहीं हैं।

मुन्ना भाइयों के रैकेट को मात देने के लिए ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा ही सबसे सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि इस बाद सीपीएमटी को सफलता से कराने के बाद अगला स्टेप 2015 की परीक्षा ऑनलाइन कराना होगा।

क्या गाजियाबाद भी होगा ब्लैक लिस्टेड?

सीपीएमटी के सुरक्षा तंत्र को भेदने में लगे मुन्ना भाइयों पर लगाम लगाने के लिए हर बार नए जतन किए गए।

परीक्षा कराने वाले संस्थानों और एमबीबीएस में प्रवेश कराने वाले रैकेट के बीच शह-मात का खेल साल दर साल चलता रहा है।

मुन्ना भाइयों को रोकने के लिए सीपीएमटी के केंद्रों के निर्धारण में भी सतर्कता बरती गई। 2006 में आजमगढ़, जौनपुर व गाजीपुर जिले को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था।

इस बार गाजियाबाद का नाम सूची में शामिल होने की संभावना पैदा हो गई है। अब देखना यह है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित परीक्षा में दोबारा गाजियाबाद को सेंटर चुना जाता है कि नहीं।

ऐसे बनाए जाते हैं केंद्र

परीक्षा केंद्रों के निर्धारण के लिए सीपीएमटी सेल कई चरणों की स्क्रीनिंग के बाद ही केंद्रों का चयन करती हैं। इसमें सुरक्षा, यातायात व्यवस्था सहित कई मानकों का ध्यान रखा जाता

केंद्रों की सीटिंग क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था के लिए बाहरी बाउंड्रीवाल, प्रवेश गेट, शिक्षकों की संख्या व उनका अनुभव भी इसमें देखा जाता है।

यदि इन सब के बावजूद भी कोई अप्रत्याशित घटना हो जाती है तो जिले को ही ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है।

इस बार गाजियाबाद में लॉकर रूम में रखे प्रश्न पत्रों को निकालने की कोशिश ने गाजियाबाद जैसे शहर को भी ब्लैक लिस्ट करने वाली सूची में डालने की नौबत ला दी है।

यदि स्क्रीनिंग कमेटी ने इस शहर को अपनी सूची से हटाया तो अभ्यर्थियों के लिए फिर से नए जनपद और केंद्रों की व्यवस्था करनी होगी।
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ओएमआर शीट खाली रखने पर लग चुकी है रोक

सीपीएमटी में खाली ओएमआर शीट छोड़ने की मुन्ना भाइयों की साजिश को फेल करने के लिए भी बुकलेट में एक खाने को पेन से भरना जरूरी किया जा चुका है।

ओएमआर शीट में किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए पांच विकल्प के गोले बनाए गए थे। अगर परीक्षार्थी विकल्प के बतौर दिए गए चार उत्तर में से किसी को भी नहीं चुनता है तो उसे पांचवें गोले को पेन से भरना होगा।

ताकि उसकी शीट को सादा न माना जा सके। अभी तक जुगाड़ से परीक्षा पास करने वाले छात्र ओएमआर शीट में चार पांच प्रश्न का उत्तर भर कर बाकी शीट खाली छोड़ देते थे।

ताकि बाद में जांचने वाले ऐजेंसी के स्तर से जोड़ तोड़ संभव हो सके। लेकिन सीपीएमटी 2009 में पांचवें विकल्प ने इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
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