राजधानी लखनऊ में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह से खाई जा रहीं मानसिक रोग की दवाएं 50 फीसदी मरीजों में साइड इफेक्ट पैदा करती हैं। यह दुष्प्रभाव युवाओं में ज्यादा होता है। केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग ने करीब एक साल के अपने अध्ययन में यह बात निकलकर आई है। इस रिपोर्ट में मानसिक रोग की दवाएं खाने वाले रोगियों की नियमित निगरानी और बगैर सलाह दवाएं नहीं खाने की सलाह दी गई है।
अध्ययन में शामिल 72 मरीजों में से 37 (51.3 फीसदी) में दवा का प्रतिकूल प्रभाव देखा गया। प्रतिकूल प्रभाव वाले मरीजों में से 62.1 फीसदी की आयु 18 से 30 साल के बीच थी। दुष्प्रभाव वाले 72.9 फीसदी मामले फ्लुओजेक्टिन दवा के थे। दुष्प्रभाव की बात की जाए तो 54 फीसदी मामलों में अन्य मानसिक समस्याएं देखी गईं। 24.3 फीसदी मामलों में अपच की समस्या देखी गई। 75.7 फीसदी मामलों में साइड इफेक्ट का इलाज करने की जरूरत भी पड़ी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मनोचिकित्सा की ओपीडी में दवाओं के साइड इफेक्ट की नियमित निगरानी और जागरूकता से दुष्प्रभाव का जोखिम कम किया जा सकता है। इससे मरीज के देखभाल की गुणवत्ता, उपचार की लागत में कमी, दवाओं का पालन और बेहतर परिणाम में सुधार हो सकता है।