लखनऊ विवि से भी पुराने शिया पीजी कॉलेज ने भी राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद (नैक) के मूल्यांकन की कवायद शुरू कर दी है।
विवि द्वारा नैक में एप्लस प्लस लाने से उत्साहित कॉलेज प्रशासन भी इसके लिए प्रतिबद्ध है। पहले चरण की औपचारिकता पूरी होने के बाद कॉलेज प्रशासन अक्तूबर में प्रस्तावित स्थलीय निरीक्षण की तैयारी में तेजी से जुट गया है।
शिया पीजी कॉलेज राजधानी के दो सबसे पुराने व छात्र संख्या के अनुसार बड़े कॉलेजों में एक है। कॉलेज इस साल पहली बार नैक के लिए गया है।
कॉलेज ने मार्च में सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) जमा की थी। इसके बाद डाक्यूमेंट की क्रॉस चेकिंग और स्टूडेंट सर्वे आदि का काम पूरा कर लिया गया है। इसी क्रम में डेटा वेरिफिकेशन व वैलिडेशन (डीवीवी) का भी काम पूरा हो गया है।
कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप शर्मा ने बताया कि कॉलेज की स्थापना 1919 में की गई है और यहां लगभग 10 हजार विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं।
कॉलेज में आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, मैनेजमेंट, लॉ सभी स्ट्रीम की पढ़ाई होती है। कॉलेज के पास काफी बड़ा और विस्तृत इंफ्रास्ट्रक्चर भी है और पूर्व छात्र भी काफी अच्छी जगहों पर तैनात हैं।
अब हम नैक के भ्रमण की तैयारियाें को अंतिम रूप दे रहे हैं। अभी मोहर्रम है। इसीलिए अक्तूबर में निरीक्षण के लिए नैक को तिथि भेजी गई है। जल्द ही वहां से तिथि तय की जाएगी।
नैक की उच्चतम श्रेणी के लिए प्रतिबद्धता से तैयारी करें : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नैक के लिए निर्धारित मानक के अनुरूप तैयारी की जाए। मूल्यांकन के हर बिंदु पर सुदृढ़ तैयारी की जाए और प्रस्तुतीकरण में उल्लिखित कार्यों के विवरण एवं डाटा के हाइपर लिंक को भी सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने प्रस्तुतीकरण में छोटे-छोटे वीडियो लिंक भी संबद्ध करने को कहा। इससे कार्यों के प्रस्तुतीकरण के समय पर ही प्रमाण का अवलोकन भी किया जा सके। वह मंगलवार को राजभवन में एसजीपीजीआई की नैक ग्रेडिंग तैयारी की समीक्षा कर रही थीं। राज्यपाल ने मूल्यांकन के सभी सातों क्राइटेरिया में छात्रों की प्रतिभागिता बढ़ाने का निर्देश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि क्राइटेरिया वाइज गठित टीम एक साथ कार्य करे और निदेशक समीक्षा करें। बैठक में राज्यमंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव राज्यपाल महेश कुमार गुप्ता, एसजीपीजीआई निदेशक प्रो. आरके धीमान आदि मौजूद रहे।