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कहानी श्रद्धा की फरारी की: राह चलते लोगों से लेती थी लिफ्ट, अजनबियों के फोन से वाई-फाई; फिर कैसे पकड़ी गई?

Thu, 22 Oct 2026 06:56 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Shraddha Dubey: फरार होने के दौरान श्रद्धा ने रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी, कैब आदि में सफर किया। जब जहां जिसे मिली उसका इंटरनेट इस्तेमाल किया।
 
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ऐसी पकड़ी गई श्रद्धा दुबे - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे के शातिरपने में कोई कमी नहीं थी। कदम कदम पर पुलिस को मात दी। पुलिस मोबाइल लोकेशन के भरोसे बैठी रही तो उसने सिम ही निकाल कर फेक दिया था। वह राह चलते किसी से भी वाई-फाई लेकर इधर उधर बातचीत करती थी। बातचीत फेसटाइम व व्हाट्सएप पर ही करती थी। इस खेल के जरिये पुलिस को छका रही थी लेकिन आखिर में वह खुद इसी वजह से जाल में फंस गई। क्योंकि उसने नागपुर ले जाने वाले कैब के मोबाइल से वाईफाई इस्तेमाल किया था। इसी के जरिये पुलिस उस तक पहुंची।

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दरअसल श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश ने फरार होने के बाद अपने मोबाइल नंबर से नॉर्मल कॉल किसी को नहीं की। तीनों ने सिम निकाल दिए थे। इसलिए इसके जरिये ट्रेस करना मुश्किल था। मगर कुछ वक्त गुजरने के बाद अचानक से उनके मोबाइल पर इंटरनेट एक्टिव होने की जानकारी पुलिस को मिली। कुछ देर इंटरनेट चलता था फिर वह बंद हो जाता था। एक तरह से लुकाछिपी का खेल चलता रहा। तब पुलिस आईपी एड्रेस करने में जुटी रही लेकिन उसको कामयाबी नहीं मिली।

इसलिए मिल रही थी नाकामी
फरार होने के दौरान आरोपियों ने रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी, कैब आदि में सफर किया। जब जहां जिसे मिली उसका इंटरनेट इस्तेमाल किया। जब पुलिस आईपी एड्रेस ट्रेस करते हुए वहां पहुंचती थी तो पता चलता था कि कि वह रिक्शा चालक है या कैब आदि चालक। इस तरह से श्रद्धा चकमा देने में जुटी थी। ये सभी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं पा रहे थे।
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ड्राइवर पकड़ में आया, तब श्रद्धा गिरफ्त में आई
जब कानपुर से श्रद्धा ने नागपुर के लिए टैक्सी बुक की तब चालक के मोबाइल के इंटरनेट ने अपना मोबाइल जोड़ा। कुछ कुछ अंतराल पर कनेक्शन जोड़ा जा रहा था फिर बंद किया जा रहा था। पुलिस इसके आधार पर उसी रूट पर सक्रिय हो गई। प्रयागराज से एसटीएफ की भी टीम रवाना हुई, क्योंकि कानपुर के बाद उसकी लोकेशन फतेहपुर में मिली थी। इसी तरह ट्रेस करते करते पुलिस नागपुर पहुंची। जब चालक आरोपियों को छोड़कर निकला तो लखनऊ पुलिस के इनपुट पर उसको नागपुर पुलिस ने पकड़ लिया। फिर वही ड्राइवर श्रद्धा के फ्लैट तक पुलिस को पहुंचाया। इस तरह श्रद्धा अपने ही जाल में फंस, जिसके जरिए वह दस दिनों तक बचती आ रही थी।

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 2200 किमी की फरारी, आगे-आगे श्रद्धा, पीछे-पीछे खाक छानती रही पुलिस

श्रद्धा दुबे। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
 शातिर श्रद्धा दुबे ने पुलिस को दस दिनों तक छकाया। श्रद्धा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ करीब 2200 किमी का सफर किया। होटलों व लॉज में ठहरीं। वह आगे आगे चल रही थीं और उनके पीछे-पीछे पुलिस खाक छानती रही। आठ से दस ऐसे ठिकाने हैं जहां से पुलिस के पहुंचने के पांच-छह घंटे पहले ही ये तीनों निकल जाते थे। यही वजह है कि पुलिस की नाकामी की कहानी बढ़ती गई। 11वें दिन जाकर पुलिस उस तक पहुंच सकी।

वारदात की रात यानी 9 अक्तूबर को श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ घायल शिवा को लेकर केजीएमयू पहुंची थीं। फिर यहीं से वह निकल गई थी। लखनऊ से सीधे वह सीतापुर महमूदाबाद होते हुए बहराइच पहुंची। यहां रुपईडीहा बॉर्डर पार कर नेपाल में दाखिल हो गई थी। पुलिस के मुताबिक नेपाल के बुटवल में गई। यहां बिना आईडी वाले एक होटल में रुकी। तभी पुलिस को उसके नेपाल जाने की सूचना मिल गई थी। पुलिस वहां पहुंची जरूर लेकिन उस तक नहीं पहुंच सकी। 16 अक्तूबर को तीनों ने नेपाल छोड़ दिया।

वह गोरखपुर के रास्ते देर रात रायबरेली पहुंची। यहां तीन घंटे तक रुकी। होटल की भी तलाश की लेकिन बिना आईडी होटल नहीं मिल सका। इसलिए वहां से तीनों टैक्सी कर लखनऊ आउटर होते हुए 17 की सुबह आगरा पहुंच गई। एक होटल में रुकी। जिसके फुटेज भी सामने आए। यहां से 18 की सुबह लखनऊ आई और विभूतिखंड इलाके में एक न्यूज एजेंसी को बाइट दी। शाम को जब ये बाइट मीडिया में आई तो पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। क्योकि उनको अपनी नाकामी का एहसास था। साफ था कि श्रद्धा आगे आगे और पुलिस बस पीछे पीछे चल रही है।

 

कदम कदम पर शातिरपन

14 अक्तूबर को पुलिस के रडार से श्रद्धा गायब हो गई थी। की लोकेशन अगले दिन नेपाल के बुटवल में मिली। 16 अक्तूबर को महराजगंज के भगवानपुर बॉर्डर के चोर रास्ते से यूपी में दाखिल हुई। पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहना और ट्रॉली बैग स्थानीय ड्राइवर को देकर कपड़े के झोले खरीदे। इसके बाद उसी ड्राइवर के साथ नौतनवा पहुंची। वहां से किराये की अर्टिगा से रायबरेली रवाना हो गई।

कानपुर में बदली टैक्सी
लखनऊ में बाइट देने के बाद श्रद्धा ने कमता से नागपुर के लिए टैक्सी बुक की। इस अर्टिका कार में सिर्फ 80किमी प्रति घंटे की ही अधिकतम रिफ्तार थी। लिहाजा कानपुर में इस टैक्सी को छोड़ दिया। कानपुर से दूसरी अर्टिका बुक की। फिर फतेहपुर सतना, आदि शहरों को होते हुए नागपुर पहुंची। वहां पर उसको अंदेशा था कि वह सुरक्षित है। यहां तक पुलिस नहीं आ पाएगी। नागपुर में वह धरी गई। हालांकि इसके पहले तक पुलिस को खूब छकाया।

बॉर्डर पार कर जाना भी बड़ी विफलता
घटना के कुछ ही देर बाद श्रद्धा भाग निकली थी। हजरतगंज पुलिस तब तक कुछ भाप ही नहीं सकी थी। मानो उनको घटना का अंदाजा ही नहीं था जबकि पीड़ित परिवार ने उसी वक्त श्रद्धा व उसके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया था। इसके बावजूद पुलिस सक्रिय नहीं हुई। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। दूसरे दिन तड़के वह नेपाल पहुंच गई। जब केस दर्ज हुआ तब उसकी तलाश शुरू हुई।
 
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कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड : कब क्या-क्या हुआ

श्रद्धा दुबे के हाईप्रोफाइल बनने की कहानी। - फोटो : अमर उजाला।
  • 9 अक्तूबर : हजरतगंज के बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर अलीगंज निवासी कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
  • 10 अक्तूबर : शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर हजरतगंज थाने में मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
  • 10 अक्तूबर : पुलिस की पड़ताल में श्रद्धा और उसके साथियों की गाड़ी के सीतापुर-लखीमपुर मार्ग से बहराइच के रुपईडीहा पहुंचने की जानकारी सामने आई। उनकी आखिरी लोकेशन सुबह करीब 6:20 बजे भारत-नेपाल सीमा के पास मिली थी। इसके बाद उनके नेपाल भागने की आशंका जताई गई।
  • 13 अक्तूबर : डीसीपी मध्य ने तीनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। पुलिस को बहराइच के रुपईडीहा इलाके में श्रद्धा की एसयूवी पार्किंग में खड़ी मिली।
  • 15 अक्तूबर : सोशल मीडिया पर श्रद्धा के वीडियो सामने आए। उसने शिवा की मौत को आत्महत्या बताते हुए खुद को निर्दोष बताया। एक अन्य वीडियो में शिवा के कर्ज और जेवर ले जाने के दावे भी सामने आए।
  • 16 अक्तूबर : पुलिस ने श्रद्धा और अन्य आरोपियों की तलाश में नेपाल पुलिस से मदद मांगी।
  • 17 अक्तूबर : श्रद्धा दुबे, रश्मि और तनवीर अली उर्फ दानिश के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। उसी दिन हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया।
  • 18 अक्तूबर : पुलिस ने फरार चालक दानिश के परिजनों से पूछताछ की। आरोपियों पर इनाम की राशि 25-25 हजार से बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी गई। उसी दिन डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को पद से हटा दिया गया।
  • 19 अक्तूबर : श्रद्धा की तलाश में पुलिस टीम रायबरेली स्थित उसके घर पहुंची और उसके पिता एसपी दुबे व सौतेली मां से पूछताछ की। श्रद्धा की गिरफ्तारी न होने पर एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को भी पद से हटा दिया गया।
  • 20 अक्तूबर : लखनऊ पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई कर नागपुर से श्रद्धा, रश्मि और चालक दानिश को गिरफ्तार किया।
  • 21 अक्तूबर : श्रद्धा, रश्मि और चालक दानिश को नागपुर कोर्ट में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड मिलने पर हजरतगंज पुलिस तीनों कोे लेकर लखनऊ के लिए रवाना हुई।
  • 21 अक्तूबर : श्रद्धा का मित्र व मैनेजर नामजद आरोपी आदिल को भी यूपी एसटीएफ ने बुधवार दोपहर गिरफ्तार किया।
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