सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन संकट गहराता जा रहा है। गैस कंपनी मांग अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पा रही है। जिन अस्पतालों में मार्च से पहले 15 से 20 सिलेंडर की आपूर्ति होती थी, वहां अब दस गुना मांग बढ़ गई है। कंपनी रेट कॉन्ट्रैक्ट के बाद भी इतनी आपूर्ति करने में हाथ खड़े कर ले रही है। अस्पताल प्रभारी किसी तरह काम चला रहे हैं।
बलरामपुर अस्पताल में मार्च में रोजाना 80-90 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति होती थी। मौजूदा समय में कोविड अस्पताल बन जाने बाद यहां ऑक्सीजन की मांग 500 सिलेंडर से अधिक पहुंच गई। वहीं, गैस कंपनी करीब 300 सिलेंडर ही दे पा रही है। बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता के मुताबिक, संकट के बीच किसी तरह काम चला रहे हैं। यही हाल लोकबंधु अस्पताल का है। यहां भी करीब 500 सिलेंडर की मांग है। सीएमएस डॉ. अमिता यादव के मुताबिक, गैस कंपनी 250-300 सिलेंडर ही दे पा रही है। वहीं, लोहिया संस्थान में जहां पहले रोजाना 40-45 सिलेंडर की जरूरत पड़ती थी, वहां अब 150-200 से अधिक सिलेंडर तक खत्म रहे हैं। लोहिया के हॉस्पिटल ब्लॉक में 350 बेड की क्षमता है। यहां मरीज भी अधिक होते हैं और उसी अनुपात में सिलेंडर की जरूरत पड़ रही है।
गंभीर मरीज पर चार घंटे में एक जंबो सिलेंडर की खपत
कोविड अस्पतालों में भर्ती होने वाले अति गंभीर मरीजों व वेंटिलेटर पर जाने वाले मरीजों पर चार घंटे में एक जंबो सिलेंडर की खपत हो रही है। ऐसे मरीजों पर रोजाना आठ से नौ सिलेंडर लगता है। एक जंबो सिलेंडर में करीब 13 लीटर ऑक्सीजन होती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अस्पतालों में भर्ती कोविड मरीजों में 70 फीसदी गंभीर हैं। निजी गैस कंपनी के मैनेजर ने बताया कि फरवरी तक निजी अस्पतालों में रोजाना अनुमान मुताबिक करीब 16 हजार जंबो सिलेंडर की खपत थी। सरकारी, अर्द्ध सरकारी, निजी मेडिकल कॉलेज में 15 से 20 हजार सिलेंडर लगते थे। अब कोविड अस्पतालों में ही रोजाना करीब 25 हजार सिलेंडर की खपत है।