शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने कहा कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में वर्ष 1528-29 में मंदिर तोड़कर बलपूर्वक बाबरी मस्जिद बनवाई थी। मीर बाकी के इस कृत्य से शिया समुदाय शर्मिंदा है।
अयोध्या में राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने के प्रमाण पुरातत्व विभाग की खोदाई के दौरान भी मिले हैं।
खुद गोस्वामी तुलसीदास ने इस पर एक दोहा ‘...राम जन्म मंदिर जहं, लसत अवध के बीच। तुलसी रची मसीत तहं, मीर बाकी खाल नीच...।।’ लिखा है। रिजवी सोमवार को पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, मीर बाकी के इस कृत्य की वजह से तब से लेकर आज तक हिंदू व मुस्लिम समाज के बीच विवाद है। अब तक इस मामले में हजारों जानें जा चुकी हैं।
आज वह मस्जिद भी मौके पर मौजूद नहीं है। लेकिन कुछ मौलवी जिन्हें विदेश से भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पैसा मिल रहा है, वे इस्लाम का गलत प्रचार करके हिंदुस्तान में फसाद कराना चाहते हैं।
ऐसे मुल्ला व मौलवी देश के मुसलमानों को गुमराह करने के लिए कहते हैं कि आपसी सुलह-समझौते से यह मामला हल नहीं हो सकता।
जो अदालत का फैसला होगा उसे वे मानेंगे। लेकिन सच तो यह है कि यदि फैसला इनके खिलाफ आएगा तो भी ये नहीं मानेंगे बल्कि बेगुनाह इंसानों का कत्लेआम करवाएंगे।
मीर बाकी शिया थे इसलिए शिया वक्फ बोर्ड का हक
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के सवाल पर रिजवी ने कहा, शिया वक्फ बोर्ड ने हमें शपथ पत्र दाखिल करने के लिए अधिकृत किया है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में हमने अपना पक्ष रखा है।
चूंकि मीर बाकी ने यह मस्जिद बनवाई थी और वे शिया समुदाय के थे, इसलिए मस्जिद पर शिया वक्फ बोर्ड का अधिकार है। बोर्ड ने विवाद खत्म करके मुस्लिम बहुल क्षेत्र में विवादित स्थल से दूर नई मस्जिद बनाने की बात कही है।
यहां फिर से राम मंदिर स्थापित हो चुका है। इसलिए शिया वक्फ बोर्ड किसी भी धार्मिक स्थल को फिर से तोड़कर वहां मस्जिद बनाने के पक्ष में नहीं है।
ईरान व इराक के आयतुल्लाह ने भी दी यही राय
वसीम रिजवी ने बताया कि उन्होंने इस मसले पर ईरान व इराक केआयतुल्लाह से भी राय मांगी थी। जनाब सैयद अली फातमी ने अलग जगह पर मस्जिद बनाने की राय दी है। जबकि जनाब आयतुल्लाह मकरीम शीराजी साहब ने इस मामले में लड़ाई, झगड़ा और विवाद से मना किया है। उन्होंने कानून के द्वारा या दोस्ताना माहौल में बातचीत कर मामला हल करने की सलाह दी है।
दूसरी जगह मस्जिद बनी तो नहीं रखा जाएगा बाबर का नाम
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, विवादित स्थल से दूर किसी मुस्लिम बहुल इलाके में यदि मस्जिद बनाई जाएगी तो उसका नाम बाबर या मीर बाकी के नाम पर नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसका नाम मस्जिद-ए-अमन रखा जाएगा। इसके जरिए देश में अमन का पैगाम दिया जाएगा।