उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि बसपा शासन में सहकारी बैंकों में हुई नियुक्तियों की जांच कराई जाएगी।
यदि किसी मैनेजर की शैक्षिक योग्यता मानक से कम मिली तो उसे चपरासी बना दिया जाएगा। उन्होंने सहकारी बैंकों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों का अधिकार संचालक मंडल को देने की घोषणा की।
शिवपाल सिंह शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यूपी कोऑपरेटिव बैंक की 56वीं वार्षिक सामान्य बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में सहकारिता आंदोलन को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा, 'सपा सरकार ने प्राथमिक से लेकर शीर्ष सहकारी समितियों तक के निष्पक्ष चुनाव कराए। कई प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगों से सहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि बहुत सारे ऐसे लोगों की भर्तियां कर ली गई हैं, जो शैक्षिक योग्यता भी पूरी नहीं करते।'
उन्होंने प्रमुख सचिव सहकारिता एवं रजिस्ट्रार देवाशीष पंडा को नियुक्तियों की जांच कराने के निर्देश दिए। शिवपाल ने कहा कि हम किसी की नौकरी लेने के पक्षधर नहीं है। यदि तृतीय श्रेणी के अफसरों की शैक्षिक योग्यता कम मिली तो उन्हें चतुर्थ श्रेणी के पद पर भेज दिया जाएगा।
सहकारिता मंत्री ने कई बैंक अध्यक्षों की मांग पर चतुर्थ और तृतीय श्रेणी कर्मियों की भर्ती का अधिकार संचालक मंडलों को देने का आश्वासन दिया। इसकी औपचारिकता शीघ्र पूरी कर ली जाएगी, लेकिन इन पदों की योग्यता शासन स्तर से तय की जाएगी।
इस पर सभी प्रतिनिधियों ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि यूपी कोऑपरेटिव बैंक ने सहकारिता के विकास में अभूतपूर्व योगदान करते हुए 2012-13 में 4872.88 करोड़ रुपये का अल्पकालीन फसली ऋण दिया।
इससे 38.86 लाख किसान लाभान्वित हुए। गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 33 चीनी मिलों को 2596.27 करोड़ का वित्त पोषण किया गया। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है।
यदि केंद्र 922 करोड़ रुपये दे देता तो 16 बीमार बैंकों को आसानी से पुनर्जीवित किया जा सकता था। भले ही थोड़ी देर हो लेकिन किसी बैंक को बंद नहीं होने दिया जाएगा।
इस मौके पर बैंक के प्रबंध निदेशक एससी द्विवेदी, पीसीएफ के अध्यक्ष आदित्य यादव, इफको के निदेशक छोटे सिंह यादव, बनवारी सिंह यादव आदि मौजूद थे।
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