फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुसलमानों को पार्क में नमाज पढ़ने से रोकना भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे का विस्तार: शिवपाल यादव

Thu, 27 Dec 2018 03:40 PM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
शिवपाल सिंह यादव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संयोजक शिवपाल सिंह यादव ने मुस्लिमों को पार्क में नमाज पढ़ने से रोकने को असंवैधानिक करार देते हुए ऐसा आदेश देने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

विज्ञापन


शिवपाल ने ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा हिंदू-मुस्लिम विवाद को चर्चा में बनाए रखना चाहती है जिससे कि तबाह होते छोटे व मध्यम उद्योगों व कानून व्यवस्था में मिल रही असफलता पर लोगों का ध्यान न जाए।

उन्होंने कहा कि मैं सरकार से मांग करता हूं कि नमाज पर रोक लगाए जाने से संबंधित आज्ञा जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि पहले फरीदाबाद फिर गुड़गांव व अब नोएडा में कारखानों में काम करने वाले अप्रवासी गरीब मजदूर मुस्लिम भाइयों को पार्क में नमाज पढ़ने देने से रोकने की घटना दुःखद एवं असंवैधानिक है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन

 

 


आपको बता दें कि नोएडा के सेक्टर-58 में खुले में नमाज पढ़ने पर पुलिस की पाबंदी को लेकर देश में सियासत गर्मा गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने नमाज पढ़ने पर रोक लगाते हुए पाबंदी के फैसले को अनुचित व एकतरफा करार दिया था।

Trending Videos
विज्ञापन

राज बब्बर ने सार्वजनिक स्थानों पर लग रही शाखाओं पर भी लगाने को लिखा पत्र

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर - फोटो : amar ujala
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने नोएडा में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने से रोक के यूपी पुलिस के आदेश पर सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कहा है कि शिक्षण संस्थानों और पार्कों में आरएसएस की शाखाएं लग रही हैं, जहां समाज को विघटित करने के विचार दिए जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर इस तरह की गतिविधियों पर पाबंदी लगाने की मांग की है।

राज बब्बर ने लिखा है कि पुलिस ने प्रदेश के सभी संस्थानों और कार्यालयों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि उनके यहां काम करने वाले कर्मचारी संस्थान परिसर के अंदर व परिसर के बाहर स्थित सार्वजनिक पार्कों में अपने कर्मचारियों को नमाज पढ़ने से रोकें। इसमें हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला भी दिया गया है। जबकि, सर्विस कंडक्ट रूल्स में स्पष्ट रूप से लिखा है कि संस्थान के कर्मचारी या सरकारी संस्था के कर्मचारी या परिवार के सदस्य किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकते है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें