शिवपाल ने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) कह रहे हैं कि उनको सम्मान नहीं दिया जाता। उनकी उपेक्षा हो रही है। मोर्चा बनाकर नेता जी का सम्मान वापस दिलाऊंगा। खुद भी सम्मान करूंगा और उनसे भी सम्मान करने का आग्रह करूंगा जो अभी उनका सम्मान नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नेताजी को भी मोर्चा से जोड़ेंगे। लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि वह मोर्चा में शामिल सभी दलों और नेताओं से बात करके इस बारे में फैसला करेंगे।
हालांकि, शिवपाल ने यह कहते हुए कि वह अब भी परिवार को एक रखना चाहते हैं, एक तरह से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और अपने भतीजे अखिलेश यादव को आगाह कर दिया है कि पानी अब सिर के ऊपर निकल रहा है।
वैसे शिवपाल ने पिछले वर्ष 5 मई को ही सेकुलर मोर्चे के गठन का एलान किया था। पर, बाद में यह ठंडे बस्ते में चला गया। इसकी वजह मुलायम सिंह यादव की मध्यस्थता और शिवपाल को सम्मानजनक समायोजन का आश्वासन था। पर, न तो शिवपाल का समायोजन हआ और न ही पार्टी में सम्मान दिलाने में मुलायम सफल हो पाए।
शिवपाल को न तो पार्टी की बैठकों में बुलाया जाता था और न ही उनसे किसी मुद्दे पर सपा के फोरम पर कोई सलाह ही ली जाती थी। इसी रक्षाबंधन पर शिवपाल ने खुद भी कहा था कि इंतजार करते-करते डेढ़ साल हो गए। आखिर कितनी उपेक्षा बरदाश्त की जाए। सहने की भी कोई सीमा होती है।
गौरतलब है कि मंगलवार को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि राजभर भी शिवपाल के मोर्चा में शामिल हो सकते हैं। राजभर ने पिछले दिनों अमर सिंह को भी अपनी पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ने का न्यौता दिया था।
चाचा शिवपाल सिंह यादव के सेकुलर मोर्चा बनाने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। शिवपाल की नाराजगी के सवाल पर कहा, ‘नाराज तो मैं भी हूं, कहां चला जाऊं। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आएगा। इस तरह की तमाम चीजें होंगी।
अखिलेश ने कहा कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाना भाजपा की फितरत है। वे जब भी चाहते हैं कोई फिजूल का मुद्दा उठाकर लोगों का ध्यान बुनियादी मुद्दों से हटा देते हैं। पर, जनता सब समझती है। वह जवाब देगी।