शिवपाल के सेक्युलर मोर्चे के ऐलान के बाद सियासी हलके में सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीते सितंबर से अब तक सपा परिवार का सियासी कलह कई बार सतह पर आ चुका है।
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गौरतलब है कि सपा के वरिष्ट नेता शिवपाल यादव ने शुक्रवार को इटावा में हुई एक बैठक के बाद ऐलान किया कि वह मुलायम सिंह के सम्मान के लिए जल्द सेक्युलर मोर्चे का ऐलान करेंगे। वहीं अखिलेश ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मुझे इस बात की जानकारी नहीं है, सेक्युलर मोर्चा बनाना अच्छी बात है।
बता दें कि सबसे बड़े सियासी परिवार में घमासान सितंबर 2016 में सबके सामने आया था। तब से कई बार शिवपाल और अखिलेश के बीच सुलह की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं बनी। विधानसभा चुनाव के दौरान भी चाचा-भतीजे के बीच की अनबन साफ जाहिर होती रही। वहीं मुलायम सिंह और अखिलेश दोनों ने इस बात को माना कि परिवार का झगड़ा भी सपा की करारी हार की एक वजह है।
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12 सितंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दीपक सिंघल को मुख्य सचिव से हटाकर राहुल भटनागर की ताजपोशी की, तो शाम को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल सिंह यादव को कमान सौंप दी।
शह-मात का खेल रात तक चला और देर रात अखिलेश ने बतौर मुख्यमंत्री शिवपाल यादव को सौंपे सिंचाई, लोक निर्माण, सहकारिता व राजस्व जैसे अहम विभाग लेते हुए सरकार से कद घटा दिया।
मुलायम ने छीना अखिलेश से पद तो अखिलेश ने शिवपाल के पर कतरे
मुलायम सिंह यादव
बात यहीं नहीं खत्म हुई गुस्से में मुलायम सिंह ने अखिलेश से अध्यक्ष पद छीनकर शिवपाल को अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद गुस्से में शिवपाल ने भी इस्तीफा दे दिया। हालांकि मुलायम सिंह ने उनका इस्तीफा नहीं स्वीकार किया फिर मुलायम के काफी मनाने के बाद शिवपाल माने। इसके बाद मुलायम के कहने पर अखिलेश ने शिवपाल को और विभाग देकर उनका कद बढ़ा दिया।
इस बीच शिवपाल और अखिलेश के बीच शह और मात का खेल चलता रहा। कई बार अखिलेश और शिवपाल समर्थक भिड़े वहीं कई लोगों के इस्तीफे हुए तो कई को बर्खास्त किया गया।
इस बीच अक्टूबर में अखिलेश के पक्ष में उस वक्त एमएलसी उदयवीर और राम गोपाल यादव ने मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखी। उदयवीर ने अपनी चिट्ठी में शिवपाल को अखिलेश की सौतेली मां का चेहरा बताया तो रामगोपाल ने ये तक लिखा कि नेता जी पर राक्षसी ताकतों का साया है।
नाराज मुलायम सिंह ने उदयवीर को पार्टी से बाहर कर दिया वहीं रामगोपाल से सारे पद छीनने के साथ उन्हें भी पार्टी से निकाल दिया। इस बीच शिवपाल और अखिलेश के बीच तल्खियां और बढ़ गईं और मुलायम अखिलेश से नाराज हो गए।
मुलायम के सामने रोए अखिलेश, शिवपाल ने छीना माइक
मुलायम सिंह यादव
दोनों के बीच बात करवाने के लिए मुलायम सिंह ने पार्टी मुख्यालय में बैठक की जिसमें अखिलेश मुलायम सिंह और पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने रो पड़े। वहीं शिवपाल भी अपनी बात रखते समय कई बार भावुक हुए।
मुलायम ने अखिलेश को फटकार लगाई और बैठक खत्म होने के बाद शिवपाल और अखिलेश के गले मिलवाने की कोशिश की। इसी बीच मंच पर अखिलेश ने कुछ कहने की कोशिश की तो शिवपाल ने माइक छीन लिया और दोनों के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं भी हुई।
इसके बाद नवंबर में रजत जयंती समारोह के दौरान मुलायम के समधी लालू प्रसाद यादव ने मंच पर ही शिवपाल और अखिलेश को मिलवाने की कोशिश की जिस पर सबके सामने अखिलेश ने शिवपाल के पैर छुए और शिवपाल ने भी आशीर्वाद दिया।
वहीं रजत जयंती पर शिवपाल ने भरी सभा में कहा था, अखिलेश मुझे सीएम नहीं बनना है, खून मांगोगे खून भी दूंगा। शिवपाल ने कहा था, मेरा कितना भी अपमान कर लेना कितनी बार भी बर्खास्त कर लेना पर मैं पीछे हटने वाला नहीं। उन्होंने अखिलेश की तारीफ की और कहा कि हमने में चार साल अखिलेश को पूरी मदद की है।
मेट्रो ट्रायल पर आजम ने दूरी मिटाने की कोशिश
मेट्रो ट्रायल
दिसंबर में अखिलेश ने मेट्रो के ट्रायल रन में मुलायम सिंह और शिवपाल को बुलाया जिसमें दोनों पहुंचे। यहां आजम खां ने एक बार फिर से मुलायम और अखिलेश के बीच दूरी को कम करने की कोशिश की और मुलायम सिंह से अखिलेश की तारीफ करने के लिए भी कहा।
फिर विधानसभा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद मुलायम और अखिलेश के बीच भी तलवारें खिंच गईं। मुलायम की सूची में अखिलेश के करीबियों के नाम नदारद थे। नाराज अखिलेश ने अपने प्रत्याशियों की नई सूची जारी कर दी।
टिकट बंटवारे को लेकर सपा में छिड़े घमासान के बाद 30 दिसंबर को रामगापोल यादव ने शिवपाल यादव का नाम लिए बिना उन पर जमकर हमला बोला और कहा, पार्टी में अब सुलह की संभावना नहीं है।
वहीं 1 जनवरी को सपा में तख्तापलट हो गया। सपा राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। शिवपाल सिंह यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। अमर सिंह पार्टी से बर्खास्त कर दिए गए है। वहीं, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को पार्टी का संरक्षक घोषित किया गया है।
इसके बाद पार्टी टूटने के कगार पर आ गई। मुलायम सिंह ने पार्टी के सिंबल और पार्टी पर दावा ठोंका वहीं अखिलेश खेमे ने भी साइकिल पर दावेदारी के लिए चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। कई कागजों और दस्तावेजों का पुलिंदा ईसी को सौंपने के बाद फैसला अखिलेश के पक्ष में गया।
कांग्रेस के साथ गठबंधन के फैसले पर मुलायम सिंह एक बार फिर अखिलेश से नाराज हुए। हालांकि उन्हें मनाया गया तब वह जनसभाएं करने निकले। वहीं मैनपुरी में वोट के दौरान बूथ पर झड़प हुई तो शिवपाल ने फिर इसके पीछे इशारों में अखिलेश को दोषी ठहराया और कहा कि हमें हरवाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि शिवपाल तो चुनाव जीत गए लेकिन सपा बुरी तरह चुनाव हारी जिसके बाद शिवपाल ने कहा, घमंड की हार हुई।
वहीं शिवपाल ने इस बीच यूपी के नए सीएम योगी से मुलाकात की और अखिलेश से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने की मांग की। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार को इटावा में हुई एक बैठक के दौरान जल्द सेक्युलर मोर्चा खोलने का ऐलान किया।