लखनऊ शहरों में बेघरों के लिए बनने वाले आश्रय घरों (शेल्टर होम) के लिए चिह्नित भूमि विवादों में उलझने से इनका निर्माण अटक गया है। हालात ये हैं कि वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, अयोध्या जैसे बड़े शहरों में जमीन की तलाश पूरी नहीं हो पाई वहीं, कानपुर नगर, बरेली और मुरादाबाद की प्रगति काफी खराब है। अब निदेशक सूडा उमेश प्रताप सिंह ने परियोजना अधिकारियों को 15 दिन में जमीन तलाश कर भूमि आवंटन करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने शहरी बेघरों के लिए आश्रय योजना शुरू की थी। यूपी में योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है, लेकिन जमीन नहीं मिलने से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट नाराजगी भी जता चुका है। पिछले दिनों हुई समीक्षा में पता चला कि बड़े शहरों में अफसर जमीन उपलब्ध कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
सूडा की ओर से कराए गए थर्ड पार्टी सर्वेक्षण में वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, अयोध्या समेत कई बड़े शहरों में भूमि चिह्नित करने से संबंधित सूचना ही नहीं भेजी जा रही है। इसी तरह कानपुर नगर, बरेली व मुरादाबाद में जमीन चिह्नित करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की गई है। इस वित्तीय वर्ष में कई शहरों में 113 नये आश्रय घर बनाने का लक्ष्य है, लेकिन वित्तीय वर्ष के करीब 5 महीने बीतने के बाद भी अधिकारी एक भी शहर में जमीन उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।