कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं गुलाबो-सिताबो।
लखनऊ। चार बुलाए चौदह आए, हर शहर की रीत... बाहर वाले खाय गए जब घर के गावैं गीत... गुलाबो खूब लड़ीं, सिताबो खूब लड़ीं...। गीत की ये पंक्तियां शुक्रवार शाम संगीत नाटक अकादमी में कठपुतली शो के दौरान गूंजीं तो मौजूद श्रोता भी खुद को तालियां बजाने से रोक नहीं पाए। ‘गुलाबो-सिताबो’ की मनमोहक प्रस्तुति में जहां भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब देखने को मिला वहीं, ‘अलादीन’ का शो बचपन की यादों को ताजा कर गया।
अलादीन की कहानी भी कठपुतलियों के माध्यम दिखाई गई। विश्व कठपुतली दिवस के मौके पर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजे जा चुके कठपुतली कलाकार प्रदीप नाथ त्रिपाठी के निर्देशन में गुलाबो-सिताबो और अलादीन का मंचन किया गया।
गुलाबो-सिताबो नाम की दो सौतनों के बीच तकरार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। प्रदीप नाथ त्रिपाठी ने बताया कि 16 जून 2024 से संगीत नाटक अकादमी में कार्यशाला का आयोजन चल रहा था। इसमें शामिल प्रतिभागियों ने पेपर मेसी के माध्यम से 50 कठपुतलियां तैयार कीं, जिनके संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
शुक्रवार को इन्हीं प्रतिभागियों में से अग्नि सिंह, निहारिका कश्यप, जूही कुमारी, कोमल प्रजापति, चंद्रभाष सिंह और अंकित मोदनवाल ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि कहा जाता है कि वाजिद अली शाह की 3000 रानियां थीं, जिनके मनोरंजन के लिए कठपुतली नाटक किया जाता था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिरजू महाराज कथक संस्थान की उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यह अद्भुत शो था।
इससे पूर्व स्टडी हॉल स्कूल, गोमती नगर के सहयोग से सुबह बच्चों के लिए गुलाबो-सिताबो और अलादीन कठपुतली शो का आयोजन किया गया। इस मौके पर शैलजा, अशोक बनर्जी, विक्रम बिष्ट और अभिनेता महेश देवा आदि मौजूद रहे।