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एसजीपीजीआई : एमडी के छात्र के फेल होने के मुद्दे पर बढ़ रहा आक्रोश, साख पर सवाल

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लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के एमडी के छात्र डॉ. मनमोहन सिंह के थ्योरी में फेल होने का मुद्दा रविवार को उस वक्त और तूल पकड़ गया जब तीन दिन से अनशन कर रहे छात्र की तबीयत बिगड़ गई। मामले को लेकर पहले से मुखर पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने कैंडल मार्च निकाला और एक सप्ताह में मामले में फैसला न लिए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस बीच देशभर के चिकित्सा संस्थानों के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने भी छात्र को अपना समर्थन भेजा है। ...तो दूसरी तरफ एसजीपीजीआई ने जांच बिठा दी है। पर, इसको लेकर भी एसोसिएशन सवाल खड़े कर रहा है। छात्र व एसोसिएशन की मांग है कि फेल व पास दोनों छात्रों की कॉपी सार्वजनिक कर मूल्यांकन कराया जाए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो। इस दौरान अनशन जारी है।  एसजीपीजीआई में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में छह संकाय सदस्य हैं। इस विभाग में एमडी की दो सीटें हैं। ऑल इंडिया स्तर पर होने वाली पीजी नीट परीक्षा के बाद एमडी में एडमिशन मिलता है। पीजीआई की रैंक भी करीब 99 फीसदी के आसपास होती है। पीजी में एडमिशन लेने वाले छात्रों को तीन साल तक मरीजों के बीच काम करना होता है। इस बीच उनका मूल्यांकन होता रहता है। थ्योरी पास करने के बाद उन्हें प्रैक्टिकल की परीक्षा पास करनी होती है। इसके बाद उन्हें डिग्री मिलती है। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन मामले को लेकर आरोप लगा रहा है कि संकाय सदस्य जानबूझकर प्रताड़ित कर रहे हैं। -------------------------------------------------------- मामले पर किसका क्या रुख निदेशक ने कहा- जांच कमेटी गठित कर दी गई  एमडी छात्र मनमोहन सिंह का अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। रविवार को निदेशक प्रो. आरके धीमान ने उनसे बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।  छात्र का सवाल- जांच कमेटी के अध्यक्ष के विभाग में तो हर साल फेल होते हैं छात्र निदेशक के आश्वासन पर छात्र डॉ. मनमोहन सिंह ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा, जिसकी अध्यक्षता में कमेटी बनी हैै, उनके विभाग में हर साल छात्र फेल किए जाते हैं। ऐसे में उन्हें कमेटी पर भरोसा नहीं है। उन्होंने मांग की कि कमेटी में खुद निदेशक शामिल हों, तभी न्याय हो पाएगा। छात्रों का सवाल- छह माह में कैसे पास हो जाते हैं सूत्र बताते हैं कि इस विभाग में पिछले दो साल से एक-एक छात्र फेल हो रहे हैं। फेल होने वाले छात्र के लिए छह माह बाद दोबारा परीक्षा कराई जाती है, जिसमें पास कर दिया जाता है। इस बीच संबंधित छात्र के लिए कोई अतिरिक्त क्लास या कोचिंग जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती है। इस बीच उन्हें हॉस्टल खाली करना पड़ता है। ऐसे में छात्रों का सवाल है कि जब संबंधित छात्र मरीजों के बीच नियमित रहते हैं तो फेल हो जाते हैं और फिर छह माह बाद उनमें कौन सा हुनर आ जाता है, जिसकी वजह से वे पास हो जाते हैं?   ...और एसोसिएशन का रुख अनशन कर रहे छात्र डॉ. मनमोहन सिंह की हालत रविवार को बिगड़ गई। कहा जा रहा है कि उन्हें उल्टियां हुईं और उनका ब्लड प्रेशर लो हो गया। देर शाम रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए परिसर में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। इसमें डॉ. आकाश माथुर, डॉ. अनिल गंगवार, डॉ. श्रुति, डॉ. वसुंधरा समेत तमाम डॉक्टर मौजूद रहे।
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