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Lucknow News: दिल के प्रत्यारोपण के लिए पीजीआई तैयार

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संजय गांधी पीजीआई में सीवीटीएस विभाग के प्रमुख प्रो. एसके अग्रवाल
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संजय गांधी पीजीआई में दिल प्रत्यारोपित करने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। इसके लिए तीन मरीज भी पंजीकृत हो गए हैं। ब्रेनडेड व्यक्ति से अंगदान मिलते ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। संस्थान के कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग के 38वें स्थापना दिवस समारोह में विभागाध्यक्ष प्रो. एसके अग्रवाल ने यह जानकारी दी।
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प्रो. एसके अग्रवाल ने बताया कि अभी भी देश में सबसे ज्यादा माैतों की वजह दिल संबंधी बीमारियां ही हैं। इनमें से काफी लोगों की जान दिल प्रत्यारोपित करके बचाई जा सकती है। हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए ऐसा दिल चाहिए जो कम से कम 90 फीसदी तक कार्यरत हो। दिल प्रत्यारोपण करने के लिए ब्रेनडेड व्यक्ति की जरूरत होती है। जागरुकता की कमी की वजह से अभी भी लोग अंगदान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इसी वजह से प्रत्यारोपण शुरू नहीं हो पाया है। विभाग ने प्रत्यारोपण की सभी तैयारियां कर लीं हैं। डाॅक्टरों ने प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण भी हासिल कर लिया है।

कम होगी बायपास सर्जरी की वेटिंग
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि प्रयास किया जा रहा है कि बायपास सर्जरी की वेटिंग कम हो जाए। कुछ समय पहले तक ऑपरेशन के लिए दो साल तक इंतजार करना होता था। अब सामान्य वेटिंग छह महीने की है। इमरजेंसी वाले मरीजों की सर्जरी तुरंत की जा रही है। विभाग में इस समय तीन ऑपरेशन थिएटर क्रियाशील हैं। दो नई ओटी जल्द ही शुरू होने वाली हैं। इस समय सप्ताह में करीब 25 सर्जरी हो रहीं हैं। डाॅक्टरों के 11 पदों पर भर्ती निकाली जा रही है। इसके बाद सर्जरी की क्षमता कम से कम डेढ़ गुना हो जाएगी। इस समय विभाग में पांच डाॅक्टर हैं।
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मिनिमल इनवेसिव और रोबोटिक सर्जरी से घटी मृत्यु दर
कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग में बड़े चीर के बजाय छोटे से सर्जरी के साथ ही रोबोटिक सर्जरी भी हो रही है। इसकी वजह से मृत्यु दर कम हुई है और मरीज की रिकवरी में भी तेजी आई है। पहले जहां मृत्यु दर 10 फीसदी से अधिक थी, अब यह घटकर दो फीसदी ही रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के सहयोग से सर्जरी के परिणामों में और सुधार आएगा।

विभाग में होगा खुद का रोबोट
इस माैके पर प्रो अग्रवाल ने बताया कि इस समय विभाग में रोबोटिक सर्जरी हो रहीं हैं। वेटिंग को देखते हुए एक रोबोट की मांग की गई है। इसे मंजूरी मिलने पर विभाग के पास खुद का रोबोट होगा। ऐसे में सर्जरी के लिए इंतजार नहीं करना होगा।

क्यों जरूरी है प्रत्यारोपण
विभागाध्यक्ष ने बताया कि इस समय चार प्रकार की प्रमुख सर्जरी होती हैं। इनमें बच्चों की दिल की जन्मजात बनावट की सर्जरी, बच्चों के दिल की खराबी की सर्जरी, कोरोनरी आर्टरी की बायपास सर्जरी हार्ट फेल्योर के मरीजों में वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस लगाने की सर्जरी। वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस उस स्थिति में लगाई जाती है जब दिल काम करना बंद कर देता है। ऐसीस्थिति में वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस दिल का काम करता रहती है। वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस फिलहाल कुछ समय के लिए ही लगाई जा सकती हैं। इसके बाद दिल का प्रत्यारोपण करना होता है। इसे स्थायी बनाने पर काम हो रहा है, लेकिन इसका खर्च करीब एक करोड़ रुपये तक आता है। ऐसे में दिल का प्रत्यारोपण ही ज्यादा बेहतर विकल्प है।
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