राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू नर्सिंग भर्ती 2023 के मामले में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है। एसटीएफ ने पूरे प्रकरण में पत्रावलियां खंगालना शुरू कर दिया है। चयनित नर्सिंग अफसरों के प्रमाण पत्रों और उत्तर प्रदेश के युवाओं को नजरअंदार करने की भी जांच होगी।
जनप्रतनिधियों ने आरोप लगाया कि विज्ञापन के बाद चयन प्रक्रिया के मध्य में परिवर्तन करते हुए परीक्षा को ओएमआर आधारित मैनुअल प्रणाली से कराया गया। ऐसे में एफटीएफ परीक्षा प्रमाणी से जुड़े सभी अधिकारियों से भी पूछताछ करने की तैयारी में हैं। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही टीम केजीएमयू में पहुंचेगी। अभी तक भर्ती से जुड़ी पत्रावलियां ली गई हैं, लेकिन अब परीक्षा प्रमाणी से जुड़े लोगों का समूचा विवरण लिया जाएगा।
इसी तरह शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के अभ्यार्थियों को नजरअंदाज करके राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के लोगों का चयन किया गया। जबकि प्रदेश में आरक्षण का लाभ लेने के लिए आरक्षण अधिनियम 1994 के अनुसार यूपी का मूल निवासी होना अनिवार्य है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित पदों के सापेक्ष दूसरे राज्य के अभ्यार्थियों का चयन किया गया है।
इसी तरह अनारक्षित 510 पद विज्ञापित किए गए थे, जबकि राजस्थान के 209, नई दिल्ली के 46 एवं अन्य राज्यों के 95 का चयन किया गया। ऐसे मे उत्तर प्रदेश के सिर्फ 160 अभ्यार्थियों का चयन हुआ है। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि यूपी के अभ्यार्थियों को नजरअंदाज करने की क्या मंसा थी, इसे लेकर विस्तार से जांच की जाएगी। क्योंकि, सरकार का जोर उत्तर प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार देना है।