सातवें वेतनमान में वित्त विभाग ने फंसाया पेंच
केजीएमयू, लोहिया संस्थान और यूपीयूएमएस सैफई में चल रहा विरोध-प्रदर्शन
चिकित्सा संस्थान के कर्मचारियों और शिक्षकों को सातवें वेतनमान के तहत भत्ता देने के मामले में वित्त विभाग ने पेंच फंसा दिया है। कैडर रीस्ट्रक्चर, पदनाम की भिन्नता सहित विभिन्न मुद्दे का अड़ंगा लगने से केजीएमयू, लोहिया संस्थान और यूपीयूएमएस सैफई के कर्मचारियों और शिक्षकों को सातवें वेतनमान का भत्ता नहीं मिल पा रहा है। जबकि एसजीपीजीआई में सातवें वेतनमान के समान भत्ते देने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। ऐसे में इन तीनों संस्थानों के कर्मचारी और शिक्षक आंदोलन की राह पर हैं। हालांकि अभी इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं की गई हैं, लेकिन अंदरखाने चिंगारी सुलग रही है, जो किसी भी दिन कार्य बहिष्कार के रूप में सामने आ सकती है।
चिकित्सा संस्थानों में एम्स नई दिल्ली के कर्मचारियों एवं शिक्षकों को सातवें वेतनमान के तहत भत्ते दिए जा रहे हैं। इस मांग को लेकर एसजीपीजीआई के कर्मचारियों एवं शिक्षकों ने आंदोलन शुरू किया। इस दौरान कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के बाद छह फरवरी 2019 को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने एसजीपीजीआई के निदेशक को आदेश जारी किया। इसमें क हा कि संस्थान के सभी संकाय सदस्यों, गैर संकायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एम्स के समान सातवें वेतनमान के भत्ते दिए जाएं। चूंकि अभी तक किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएयू), डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस सैफई के संकाय सदस्यों (शिक्षक चिकित्सक) और कर्मचारियों को वेतनमान व भत्ते सहित अन्य सभी सुविधाएं दी जाती रही हैं। इसी के तहत इन संस्थानों ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा। लेकिन अभी तक यह मुद्दा लटका हुआ है।
11 फरवरी को केजीएमयू के कुलपति राजेश कुमार राय ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजा। इसमें बताया कि 11 अगस्त 2015 और 23 अगस्त 2015 को जारी शासनादेश के तहत यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों एवं शिक्षकों को एसजीपीजीआई के समान वेतन भत्ते दिए जाएं। इस पर वित्त विभाग की ओर से आपत्ति लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि अभी तक केजीएमयू का कैडर पुनर्गठन नहीं हो पाया है। दोनों संस्थानों की भर्ती की शर्तें, कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता सहित तमाम चीजें अलग-अलग हैं। पहले इसमें एकरूपता लाई जाए। इसी तरह खाली पदों को भरा जाए, इसके बाद सातवें वेतनमान के समान भत्ते देने पर विचार किया जाएगा। इसकी जानकारी मिलते ही केजीएमयू के शिक्षक और कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। दो अगस्त को हड़ताल का ऐलान किया है। इस संबंध में केजीएमयू के कुलसचिव राजेश कुमार राय का कहना है कि भत्ता देने के संबंध में वित्त विभाग की आपत्तियां मिली हैं, जिसका निस्तारण किया जा रहा है।
लोहिया संस्थान और यूपीयूएमएस सैफई में सुलग रही चिंगारी
केजीएमयू के बाद लोहिया संस्थान के कर्मचारियों एवं शिक्षकों की हुई बैठक में भी सातवें वेतनमान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। दो दिन पहले हुई फैकल्टी फोरम की बैठक में सभी शिक्षकों के एक स्वर से कहा कि उन्हें एसजीपीजीआई के समान वेतन भत्ते नहीं दिए गए तो आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होंगे। इसी तरह सैफई के शिक्षकों एवं एवं कर्मचारियों ने भी शासन को कार्य बहिष्कार केसंबंध में पत्र भेजा हैं।