बेसिक शिक्षा परिषद के पांच लाख शिक्षकों को फिलहाल सातवें वेतनमान के लिए इंतजार करना पड़ेगा। इसके लिए न तो विभाग नए वेतनमान के अनुसार गणना कर पाया है और न ही उसके पास पर्याप्त बजट है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष में उन्हें एरियर दिया जाएगा।
बेसिक शिक्षा परिषद के 1.58 लाख विद्यालयों में करीब पांच लाख शिक्षक पढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार ने कर्मचारियों की तरह इन्हें भी जनवरी से सातवां वेतनमान देने का आदेश दिया।
लेकिन, पिछले महीने उन्हें नया वेतनमान मिलना तो दूर पुराने वेतनमान के अनुसार ही तनख्वाह देने के लाले पड़ गए। विभाग के पास बजट की कमी के चलते यह स्थिति पैदा हुई।
चुनाव के समय शिक्षक संगठनों के विरोध जताने पर आनन-फानन में शासन से बजट जारी करवाया गया। साथ ही एनआईसी को नए वेतनमान के अनुसार सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए राशि भी दी गई।
अभी तक नहीं विकसित हो पाया है सॉफ्टवेयर
बेसिक शिक्षा परिषद के एक अधिकारी ने बताया कि न तो अभी तक यह सॉफ्टवेयर विकसित हो पाया है और न ही चुनावी ड्यूटी के चलते बाबू इस स्थिति में हैं कि नए वेतनमान के अनुसार वेतन की गणना कर सकें।
इसके अलावा विभाग के पास पर्याप्त बजट का अभाव भी बताया जा रहा है। नतीजतन, मार्च या अप्रैल में मिलने वाली तनख्वाह पुराने वेतनमान के अनुसार ही मिलेगी।
सचिव और कार्यकारी निदेशक, बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह ने भी स्वीकार किया कि नए वेतनमान के अनुसार गणना में थोड़ा वक्त लगेगा।
बिना अनुमति कर दिया भुगतान, पर कड़ा ऐतराज
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के तमाम वित्त एवं लेखाधिकारियों ने आयकर की राशि को आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करने वाली संस्था को बिना अनुमति के ही भुगतान कर दिया। परिषद के वित्त नियंत्रक ने इस पर कड़ा एतराज जताया है।
साथ ही भुगतान करने वाले वित्त एवं लेखाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। भविष्य में इस तरह बिना अनुमति भुगतान की घटनाओं को रोकने के लिए समुचित कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।
एनपीएस के बारे में मुहैया नहीं कराई सूचना
बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी जिलों के वित्त एवं लेखाधिकारियों से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों व शिक्षकों की कटौती राशि और सरकार के अंशदान की जानकारी मांगी थी, पर अधिकतर जिलों ने इसका ब्योरा अभी तक उपलब्ध नहीं कराया है।
इस स्थिति को परिषद ने अफसोसजनक बताते हुए तत्काल ई-मेल के माध्यम से सूचना भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।