एमिटी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार से शुरू हुए हैंड्स इन सेरीकल्चर प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन ?
लखनऊ। प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है। ओडीओपी जैसी योजना अपना परिणाम देने लगीं हैं। रेशम उद्योग भी किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा माध्यम है। काशी सिल्क उद्योग का गढ़ है, पर हम ज्यादातर रेशम चीन से आयात करते हैं। अगर हम झांसी में स्ट्राबेरी की पैदावार कर सकते हैं तो तकनीक की मदद से किसान उच्च गुणवत्ता वाला चाइना सिल्क भी पैदा कर सकते हैं। ये बातें अतिरिक्त मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नवनीत सहगल ने कहीं। वह शुक्रवार को एमिटी विश्वविद्यालय व प्रदेश के सेरीकल्चर विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय ‘हैंड्स इन सेरीकल्चर’ प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन समारोह को वर्चुअल संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर एमिटी विवि सेरीकल्चर रिसर्च और डवलपमेंट के लिए कार्य करता है तो सरकार हर संभव मदद करेगी। उन्होंने इस संबंध में एमओयू करने के लिए भी प्रस्ताव दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिरिक्त मुख्य सचिव, सेरीकल्चर विभाग रामा रमण ने प्रशिक्षण लेने आई महिलाओं से कहा कि जब वे अपने गांव वापस जाएं तो यह मानकर जाएं कि वो एक यूनीवर्सिटी से पढ़कर आ रहीं हैं और यहां प्राप्त ज्ञान पर गर्व करें। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कुल 300 मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन होता है जबकि मांग 3000 मीट्रिक टन की है। मांग और उत्पादन के बीच का यह गैप किसानों के लिए बड़ा अवसर है। उत्तर प्रदेश में हैंडलूम को तकनीकी से जोड़कर इसे और क्षमतावान बनाया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि सरकार लखनऊ में एक रेशम पार्क स्थापित करने के बारे में भी विचार कर रही है। प्रशिक्षण में लखनऊ, गोंडा और बहराइच जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों की पचास महिलाओं को रेशम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक सिखाई जाएगी। इस मौके पर डॉ. सुनील धनेष्वर प्रति कुलपति एमिटी विवि, डॉ. अशोक के चौहान, डॉ. बलविंदर शुक्ला, डॉ. नूतन कौशिक, डॉ. शालिनी सिंह विशेन, डॉ. विनीत अवस्थी, डॉ. प्राची श्रीवास्तव और डॉ. गुरजीत कौर आदि ने शिरकत की।