सूबे में महिला थानों की तर्ज पर दलितों के लिए अलग थाने खुलेंगे। इसके लिए पुलिस व समाज कल्याण विभाग के अफसरों ने मसौदा तैयार कर लिया है।
अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण योजना के तहत थानों का आधा खर्च राज्य और आधा केंद्र सरकार वहन करेगी। फिलहाल यह व्यवस्था बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में है।
सूबे में दलित उत्पीड़न व एससी/एसटी के लोगों की थानों पर सुनवाई न होने की शिकायतों के चलते उनके लिए अलग थाने खोलने का मसौदा तैयार किया गया है। इन थानों पर इंस्पेक्टर/एसओ के साथ कम से कम दो हेड कांस्टेबल व सिपाहियों के अलावा महिला कांस्टेबल की तैनाती होगी।
यहां दलित उत्पीड़न के न सिर्फ मुकदमे दर्ज होंगे, बल्कि समझौते के जरिये मामले भी सुलझाए जाएंगे। डीएसपी नोडल अधिकारी होगा और एएसपी जोनल स्तर पर ब्यौरा एकत्र करके शासन व आला अफसरों को देंगे।
महानगर से शुरू होगी व्यवस्था
विभागीय सूत्रों का कहना है कि महिला थाने की तर्ज पर पहले चरण में महानगरों में दलितों के लिए अलग थाने खोले जाएंगे। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों में व्यवस्था शुरू करने पर विचार किया गया है।
थाना खोलने में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं
देश के छह राज्यों में चल रहे दलित थानों की समीक्षा में पाया गया कि अलग थाने खुलने से प्रदेश सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। एक आला अफसर ने बताया कि पुलिस लाइन या अन्य स्थानों पर ड्यूटी कर रहे इंस्पेक्टर, दरोगा, हेड कांस्टेबल व सिपाहियों में से कुछ को चुनकर दलितों के थाने पर तैनाती की जाएगी।
मौजूदा समय में एसपी/एसएसपी ऑफिस में संचालित विशेष जांच प्रकोष्ठ के कक्ष को थाने के रूप में इस्तेमाल करने से भवन की भी समस्या नहीं होगी। इसी तरह प्रकोष्ठ का सरकारी वाहन थाने को उपलब्ध कराया जा सकता है। यानी जो व्यवस्था है, उसी में थाना संचालित किया जा सकता है। उस पर भी आधा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।
आसानी से पहुंच सकेंगे थाना
दलितों के लिए थाने ऐसे स्थान पर खोले जाएंगे, जहां वे आसानी से पहुंच सकें। इसके लिए एसपी/एसएसपी के ऑफिस या शहर के बीच स्थित भवन को चुना जाएगा, जो रेलवे स्टेशन या बस अड्डे से ज्यादा दूर न हो और आवागमन के साधन सुलभ हो। आरोपियों की गिरफ्तारी व अन्य जरूरतों पर संबंधित थाने की टीम भी मदद करेगी।
पीड़ितों को मिलेगा यात्रा भत्ता
पीड़ित को बयान दर्ज कराने या अन्य कार्रवाई के लिए थाने पर बुलाए जाने की स्थिति में उसे यात्रा भत्ता देने के साथ जलपान की भी व्यवस्था कराई जाएगी। किसी को अनावश्यक रूप से बार-बार थाने पर तलब किए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई होगी।