दुष्कर्म व हत्या का दोषी बबलू उर्फ अराफत
- फोटो : अमर उजाला
मां ने कहा कि इतने कम समय में फैसले की उम्मीद नहीं थी। लेकिन सरकार के निर्देश पर पुलिस ने जो काम किया है। उसे जिंदगी भर परिवार नहीं भूलेगा। बच्ची की मां के मुताबिक, पति दिहाड़ी मजदूर है। वह बालू मौरंग की दुकान पर ठेला चलाता है।
14 जनवरी को उसके वकील ने कचहरी बुलाया था। कहा था कि 17 जनवरी को कोर्ट फैसला सुना सकता है। दो दिन से मौसम खराब था। जिसके कारण पिता काम पर नहीं जा सका। आज मौसम खुला तो वह काम पर चला गया। घर में दाल रोटी की चिंता बेटी के न्याय के रास्ते में रोड़ा बन रही थी। लेकिन मां और बुआ को उसने अदालत में जाने को कहा।
दुष्कर्म व हत्या का दोषी बबलू उर्फ अराफत
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मासूम के पिता ने बताया कि दो दिन से काम पर न जाने के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को फैसला आना था। उसने बृहस्पतिवार देर शाम को दुकान के मालिक से दो सौ रुपये उधार लेकर आया। सुबह घर से ठेला लेकर निकलने से पहले अपनी बहन को बुलाया और पत्नी के साथ कोर्ट जाने की बात कही। दोनों को दो सौ रुपये दिए।
मासूम की मां के मुताबिक, जब जज ने फैसला सुनाया तो बबलू फफककर रोने लगा। उसने जज के सामने हाथ जोड़कर कहा कि साहब गलती हो गई है। माफ कर दीजिए। लेकिन जज उसकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिये और फैसला सुनाने के बाद कोर्ट से चले गए।
जब इसकी जानकारी मोहल्ले के लोगों को हुई तो सभी ने सरकार, पुलिस और कोर्ट की तारीफ की। कहा कि न्याय इतने कम समय में मिला है। अपने आप में नजीर है।